26 August, 2026

तुम झूठी कसम मत खाया करो

‘हमारा दिल इतना दुखता क्यों है? सिंपल एक्सप्लेनेशन काफ़ी नहीं है। कि तनहाई है। कि दोस्त नहीं हैं शहर में, और मुझे अच्छा लगता है दोस्तों के साथ होना। दिक्कत ये है कि इस दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है जिसके बारे में जानना मुझे पर्सनल लेवल पर अफ़ेक्ट करता है। और हम कुछ भी नहीं कर सकते। कुछ भी नहीं। बच्चों के स्कूल में उनका सेक्शन चेंज नहीं करा सकते, ताकि वे 6 साल के बच्चे मजबूरी में नए दोस्त न बनायें, अपने तीन साल पुराने दोस्तों के साथ पढ़ सकें। पापा जो कैफ़े बनवा रहे हैं, उसके लिए जरूरी काम रोज़ नियमित तरीक़े से करते जाएँ। हमको अपने दिल का ढंग से ख्याल रखना तक नहीं आता, कि ख़ुश रह सकें।’ 

‘मैं क्या कहूँ तुमसे, कि तुम्हारा दिल हल्का हो सके थोड़ा?’ 

‘कहो कि मेरा एक गुनाह माफ कर दिया तुमने।’

‘लो, कर दिया!’

‘अरे, पहले सुनो तो सही, कि कौन सा गुनाह किया है मैंने!’

‘अगर मेरे हक में है, तुम्हारा कोई भी गुनाह माफ करना, तो मैं तुम्हें अपना क़त्ल भी माफ़ करता हूँ।’

‘पता है, जब दिल दुख से एकदम लबालब भर जाता है और जलने सुलगने लगता है तो मैं न एक छोटी गोल्डफ्लेक सुलगाती हूँ। आधी पीती हूँ, और बेरहमी से बुझा देती हूँ। ये, किसी दुनिया में तो गुनाह होगा ही। जिस चीज़ से मेरे दिल को तसल्ली मिलती है, उससे इस दुनिया का कुछ नुक़सान न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता, फिर जिस चीज़ से दुनिया को हर्ज़ हो, उसके लिए नियम-कानून बने ही होंगे। है ना?’

‘इतनी छोटी सी गोल्ड-फ्लेक होती है। सिगरेटों में सबसे छोटी। उसे भी आधी पी कर बुझा देना अय्याशी है। जरा अपने सियाह दिल में झाँक के देखो, ऐसा करना तुम्हें ग़लत नहीं लगता? मालूम है सिगरेट कितनी महंगी हो गई है। इसी दुनिया में ऐसे लोग हैं जो बिचारे एक सिगरेट आधी बुझा बुझा कर पीते हैं, क्यूंकि दो सिगरेट पी पाने के पैसे नहीं हैं, और तुम यूँ ही आधी सिगरेट पी कर बुझा देती हो, कि तुम्हारा मन है। मेरी दुनिया के चिलमची तुम्हें मेरे शहर आने की इजाज़त नहीं देंगे।’

‘बकवास। किसकी मजाल जो मुझे तुम्हारे शहर आने से रोक ले। ट्रेन है, बस है, हवाई जहाज़ है…कहाँ कहाँ के रास्ते रोक लेगा कोई। मुझे तुम तक आने से सिर्फ़ मेरा दिल रोकता है। भगवान से मनाओ कि मुझे सद्-बुद्धि दें कि बिना तुम्हें नोटिस दिए उड़ के तुम्हारे शहर न आयें।’

‘ये दुर्बुद्धि वाली बेवकूफ मनौतियां तुम माँगो। देख लेना, अगली बार ऊपर से कुछ फेंक कर मारेंगे भगवान जी। नारियल गिरेगा गाड़ी पर, रोना फिर। क्यों नहीं आना मेरे शहर? क्यों नहीं मिलना मुझसे? सिंपल चीज़ें किया करो ना तुम। हर बात को कॉम्प्लिकेटेड करना क्यों जरूरी है?’ 

‘शुरुआत तुम करो ना, कहो कि तुमने ये गुनाह माफ किया मेरा।’

‘मैं कौन होता हूँ ये गुनाह माफ करने वाला। लेकिन मेरे हक में जितना आता है, लो, माफ किया तुम्हें। तुम आधी क्या, एक कश मार के भी गोल्ड फ्लेक फेंक दो तो तुम्हारे हिस्से की सज़ा मुझे मिल जाये। खुश?’

‘पता है, मेरा एक हिस्सा तुमसे कभी नहीं मिलना चाहता है, क्यूंकि तुम मिलोगे तो तुमसे पूछ लेंगे, सीधे, ‘प्यार करते हो मुझसे?’, और मैं जानती हूँ कि इस सवाल का जवाब दन्न से, ‘हाँ’ नहीं आयेगा। लेकिन ये subjective type नहीं, ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल है। इसका जवाब हाँ या ना होता है, वो भी रैपिड फायर राउंड की तरह। सोचने का वक्त दिए बगैर। कोई नया शहर जो हम दोनों ने न देखा हो। उस एक शहर हम कभी दुबारा लौट कर न जायें। हमको लगता है, ज़मीन-आसमान-शहर-भगवान सब मटियामेट होता है एक ही सिंपल सवाल में.’

‘एग्जाम की तैयारी करने में यकीन रखते हैं हम। पूरा दीवार नोट्स से रंग दें। जेब में पुर्जियाँ। हाथ में इक्वेशंस। इतनी तैयारी, इतनी मेहनत करते हैं। हमेशा। तुमको क्यों लगता है ये सवाल मैंने सोचा नहीं होगा?’

‘क्यूंकि तुम्हें फुर्सत नहीं मिलती।’

‘रुको हमारे शहर। एक पूरा दिन। देखो, दिन के कितने वक्त सोचता हूँ, तुम अब अजनबी नहीं हो। तुम अब मेरे शहर में हो। तुम्हारी व्यस्तताएँ हैं। काम है। मीटिंग्स हैं। दोस्त हैं। मेरे सिवा भी तुम्हारा एक जीवन है, जब कि तुम मेरे शहर में हो। क्या पता, मैं भी आधी आधी सिगरेट पीना शुरू कर दूँ।’

‘बुरी आदतें जल्दी लगती हैं ना?’

‘पता नहीं, पहले तो ये बताओ, ये आधी सिगरेट बुझा के तसल्ली मिलती है। सच में?’

‘तुम्हारी तसल्ली अलग होगी। मेरी बेचैनी का कोई हल नहीं है। पता नहीं क्या क्या दुखता रहता है। पिछले जन्म का दुख ही है। आत्मा में कचकता। इस जन्म का कोई दुख इतना गहरा हो ही नहीं सकता, लेकिन फिर भी। जितना जानती हूँ इस दुनिया को, जैसे धरती का सारा दुख धड़कन में चुभने लगता है। तुम्हें मालूम है, बाँध बनने के पहले नदियों का रूट पहले से फिक्स नहीं होता था। वे हर बार अपनी मर्जी से बहती थीं। अंदाज़ से…यकीन से…कि जहाँ भी जाएँगे, आख़िर को समंदर होगा ही। कि समंदर पहुँचने के पहले नहीं थकेंगी वे। तुमने कभी सोचा है, बाँध नदी के वेग को कम करता है। क्या हो अगर नदी समंदर पहुँचने के पहले थक जाये। रुक जाये। फिर क्या होगा? अमेरिका में एक नदी है, कोलोराडो। उसपर कई सारे बांध बने हैं और उसका पानी कई तरह के इरीगेशन सिस्टम के लिए इस्तेमाल होता है। दरअसल जितना पानी पहाड़ों से आता है और बारिश में मिलता है, नदी जिस रास्ते बहती आती है, लोगों को उससे ज़्यादा पानी की ज़रूरत पड़ती है। तो नदी समंदर तक पहुँच ही नहीं पाती। पूरा कोलोराडो डेल्टा सूख गया है।’

‘और इस वाक़ये से तुम्हें बेचैनी होती है?’

‘ठीक इस वाक़ये से नहीं। लेकिन जब पहली बार इस घटना के बारे में जानती हूँ, तो दुखता है। जैसे कि दुनिया का सारा दुख समझना है मुझे। झेलना है अपने ही दिल पर। आदमी क्या अजीब चीज़ होता है यार, सोचो। 2014 में साइंटिस्ट्स ने सोचा कि इस सूखी हुई नदी में hoover dam से थोड़ा ज़्यादा पानी भेज कर देखते हैं, क्या इकोसिस्टम रिवाइव करेगा। आदमी की क्यूरोसिटी, माने अचरज के लिए पूरी दुनिया, लोग, जानवर, मौसम…सब कुछ एक एक्सपेरिमेंट है। शायद, अचरज हमेशा अच्छा नहीं होता। कुछ चीज़ों का रहस्य बना रहना चाहिए। नदियाँ कैसे बहती हैं। हवाएं एक ही दिशा में क्यों चलती हैं। समंदर का पानी इतना खारा क्यों है। तुम्हारे दिल में मेरे लिए क्या है। मुझे नहीं जानना कुछ भी।’

‘मेरे दिल में तुम्हारे लिए क्या है, वो भी एनवायर्नमेंटल क्राइसिस है?’

‘नहीं। वो ऐसा रहस्य है जिसे जानना उस पूरे इकोसिस्टम को तोड़ना है जो एक नदी के समंदर तक पहुँचने में बनता है। हम उसे समझ कर उसकी रखवाली करेंगे या उसका विनाश, ये हमें नहीं मालूम। मुझे ये तबाही नहीं चाहिए। मेरा अचरज भला है।’

‘तुम्हें क्या चाहिए, पहले तुम ख़ुद समझ जाओ। फिर हमसे पूछना।’

‘हमको तुमसे कुछ नहीं पूछना। मेरी सिगरेट ख़त्म हो गई है सारी, ऑफिस से आते हुए लेते आना। मुझे एयरपोर्ट पहुंचते पहुंचते लेट हो जाएगा। बोर्ड करने के पहले एक सिगरेट पी कर निकलेंगे।’

‘तुम सच में आज लौट जाओगी?’

‘हाँ। अच्छी कहानी की मियाद एक ही दिन की होती है।’

‘लेकिन अच्छी कहानी के किरदार तो अच्छे होते हैं ना? हम तो बुरे लोग हैं।’

‘अच्छे किरदारों की कोई अच्छी कहानी नहीं होती। ये अच्छा है कि हम बुरे हैं। हमारे ऊपर कोई बाँध नहीं बनाता। हमारा पानी ज़हरीला है। हमें न कोई रोकने की कोशिश करेगा, ना समझने की…न दोस्ती, न मुहब्बत। हम अजनबी लोग हैं। हर बार मिल कर लौटते हैं तो थोड़ा सा और अजनबी हो जाते हैं।’

‘यार, बताओ, मैं एक परफेक्ट अजनबी तक नहीं बन पाया तुम्हारे लिए। तुम थोड़ा सा जान गई मुझे। मैं थोड़ा सा जान गया तुम्हें। ये थोड़ा सा खतरनाक तो हो ही गया।’

‘हाँ, लेकिन ज़हरीले पानी की तरह नहीं। सिगरेट की तरह। हो सकता है हम सिगरेट पीने से मर जायें, लेकिन जितने ज़िंदा हैं, वे दिन अच्छे हैं। धुंधले हैं। और तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारे पास हैं।’

‘सिगरेट आधी मत फेंका करो। मुझे पाप लगेगा।’ 

‘तुम्हारी क़सम, पियेंगे ही नहीं आज से।’ 

***
बुकोस्की के ख़त में एक पंक्ति है, ‘For all things will kill you, both slowly and fastly, but it's much better to be killed by a lover.’

No comments:

Post a Comment

Related posts

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...