13 August, 2026

गोलघर चलोगे? गंगा एकदम ललमटिया गई होगी


  
It will never be not strange. 

कि सपने में बौखते हुए तुम अचानक से न टकराओ। धुंध-भरी स्काईलाइन पर कई इमारतें हों। कुछ न्यू-यॉर्क, कुछ पेरिस…नदी बहती हो, दूर कहीं…कई नदियाँ मिली-जुलीं। पता नहीं तुम नदियों को उनके पानी से पहचानते हो या नहीं, पर मुझे सारी नदियाँ अलग-अलग याद रहती हैं। बहती हुई नदी का रंग ही नहीं, उसका गुनगुनाना भी अलग अलग होता है। उसके किनारे के पत्थर, उसके किनारे की मिट्टी। उसकी गंध।

नदी किनारे किन लोगों से मिलते हैं हम?
तुम्हारे साथ गंगा-घाट पर कभी नहीं बैठी हूँ, लेकिन फिर भी कहानी लिखते हुए तुम अक्सर दिखते हो। वहाँ बैठे, बतियाते। तुमसे कितने शहरों में मिली हूँ, लेकिन हमेशा लगता है हमारे पास पास बैठने से पैरों के नीचे गंगा बहने लगी हो। बहती नदी का फ्लो पैरों में मालूम चलता है। तुम हम बतियाते हैं तो पटना ही उगता है हमारे इर्द-गिर्द। दिल्ली में होते हुए भी लगता है, कोई रिक्शा आए तो उससे पूछ लें, गोलघर चलोगे? उसके न चलने पर तुमसे पूछें, अच्छा, पैदल चलोगे? आज गोलघर पर चढ़ के दूर दूर तक गंगा देखने का मन करता है।

आज सुबह आर्या पूछी कि मम्मी तुम किस शहर में सबसे पहले गई थी। हमको याद नहीं था ठीक ठीक, लेकिन जो याद में पहला था, वो हरिद्वार था। हम मम्मी के पोंचू में एक गर्माहट में बैठे थे। बर्फ गिर रही थी। हम केदारनाथ जा रहे थे। किसी पालकी में बैठ कर। मुझे मालूम नहीं, ये याद सच की है या नहीं। हम पापा से पूछ कर कन्फर्म कर सकते हैं, लेकिन नहीं करते। ट्रैवल की मेरी पहली याद वही है। हमको कभी कभी लगता है, शायद यह पिछले जन्म की याद हो। छोटे बच्चों को पिछला जन्म भी याद रहता है। हरिद्वार की फोटो में बाबा बैठे हुए हैं, चुक्कू-मुक्कू। शायद कुल्ला कर रहे हों। थोड़ा वाइट वाश जैसी फोटो है। जैसे एक्स्ट्रा ब्राइट फ़िल्टर लगा हो। मैं याद में ही घूम रही हूँ, कि वो पूछती है, were you happy? आर्या अक्सर पूछती है, कि मैं ख़ुश हूँ, या ख़ुश थी। उसके लिए ये जानना जरूरी है कि हम ज़िंदगी के किसी भी पड़ाव पर बहुत ख़ुश थे या उदास थे। 

तुमसे इतनी इत्मीनान से मिलते हैं। जैसे मालूम है। अभी कई जन्म मिलना है तुमसे। कोई हड़बड़ी नहीं है। कि हमारे पास इनफ़ाइनाइट टाइम है। हम थोड़ा थोड़ा कर के ही मिल पायेंगे। कई जन्मों में। लेकिन फिर भी कहना चाहती हूँ, हमेशा तुमसे। सुनो, अगले जन्म थोड़ा पहले मिलना हमसे। हमारे तुम्हारे बीच नदी बहती है, लेकिन सरस्वती। हम उसे देख नहीं पाते, उसके पानी से आचमन नहीं कर सकते। लेकिन स्याही बनाने के लिए गोल काली टिक्की घोलनी है, हम ऐसे हवा में चुल्लू बनाते हैं और उसमें सरस्वती नदी का पानी आ जाता है। मैं कहानी में तुम्हें देखती हूँ, काग़ज़ पर ख़त लिखते हुए। कहानी में जो तुम हो, वो कहता है मुझसे, कि उसके पास मेरे लिए कई सारी अधूरी चिट्ठियाँ हैं। कि वो जेब में पोस्टकार्ड लिए घूमता है कि मेरे पते पर भेज सके, लेकिन दुनिया में पोस्टऑफ़िस ही नहीं बचे हैं, तो मेरा ख़त कोई पहुँचा ही नहीं सकता। 

मैं पढ़ती हूँ चिट्ठी, तुमने लिखा है, तुम्हारे जाने के बाद शहर ठहर गया है। यहाँ का मौसम। आसमान के बादल। नदी की लहरें। हवा। ट्रैफिक। कुछ हिल तक नहीं रहा अपनी जगह से। तुम स्टेच्यू कर के चली गई हो मेरा शहर। वापस आओगी, रिलीज़ करने। कि तुम्हारे दिल में एक ठहरा हुआ दिन है। एक बहुत लंबी वाक है। पोलॉक की पेंटिंग साथ में नहीं देख पाने का अफ़सोस है।

मुझे रफ़्तार से डर लगता है। जिस रफ़्तार से मन उड़ता है। जितने सवाल करता है। आज एक फ़िल्म देखी, विकी क्रिस्टीना, बार्सिलोना। हम अलग अलग शहरों में बदले हुए लोग होते हैं। कुछ शहर एक धारदार खुखरी से चीरते हैं, बीचोंबीच और हमें दो फाँक खोल देते हैं। तुमने ख़ुद के दो टुकड़े हुए देखे हैं? जब कि दिल प्रेजेंट और पास्ट का इश्क़ एक साथ करता है…कि जिसके साथ हैं, उससे मुहब्बत है ही, लेकिन कोई अतीत से छूट नहीं रहा। कोई आत्मा में धँसा हुआ है। चुभता हुआ, रिसता हुआ। क्रिस्टीना को मुहब्बत में कोई फ़ाइनालिटी नहीं चाहिए, उसे इन फैक्ट, मालूम नहीं कि उसे क्या चाहिए। उसे बस ये मालूम है, कि जो है पास में, वो नहीं चाहिए।

क्या सबके भीतर कोई अधूरी मुहब्बत ज़िंदा रहती है?

क्राकोव के ओल्ड टाउन स्क्वायर के बीच में एक झरना था। वहाँ तक पहुँचती बहुत सी सड़कें और उन सारी सड़को पर बहती हुई धुनें। आँख बंद करो, हवा में सुनाई देती है, कहीं दूर से उड़ती हुई धुन। तुम कभी किसी एन्सिएंट एम्फीथियेटर में खड़े हुए हो, अकेले? आँख बंद करने पर हवा में बहुत पुरानी धुन बहती हुई आती है और एकदम से तुम्हें लपेट लेती है चारों तरफ़ से, जैसे कोई शॉल उड़ता हुआ आ गया हो हवा में और लिपट गया हो तुमसे। जैसे सर्द मौसम में जरा सी गर्माहट हो। कि दाँत किटकिटाने बंद हो जायें। जैसे गर्म वाइन का एक घूँट उतरा हो भीतर। जैसे सेंक दे, कोई अलाव में हाथ गर्म कर के, तुम्हारा चेहरा।

जिन शहरों में तुम्हारी याद न हो, मैं उन शहरों में करूँगी भी क्या? ख़ाली पोस्टकार्ड्स। बिना किसी पते के। कभी पेन रखना भूल जाऊँ, तो किसके पास से मिलेगी कलम? आजकल तो कोई भी पेन लेकर नहीं चलता साथ में। मेरी कहानी में मैं हमेशा तुम्हें चिट्ठियाँ लिख रही हूँ। 

फ़िल्म का मेरा पसंदीदा हिस्सा वो है जहाँ हुआन और मारिया एलिना, दोनों पेंट कर रहे हैं। उन्हें ऐब्सट्रैक्ट पेंटिंग बनाते हुए देखना मुझे पोलॉक की याद दिलाता है। पेंट करने में एक इंटेंसिटी है। मूवमेंट है। अनप्रेडिक्टेबिलिटी है। ऐबस्ट्रैक्ट पेंटिंग इस मूवमेंट को थिर करता है, कई रंगों में, बहते हुए पेंट में, केओस में। पेंट करते हुए हुआन सिगरेट पी रहा है, उसके कपड़ों पर पेंट के छींटे हैं। मारिया कैनवास के ऊपर चलते हुए बड़े से रोलर से कैनवास पेंट कर रही है। उसके इर्द गिर्द बहुत से पेंट के डिब्बे हैं, ब्रश है, फर्श पर गिरा हुआ पेंट है। पेंट करने की प्रोसेस भी पेंटिंग जितनी सम्मोहक है।

मारिया एलीना कहती है, हुआन ने उसके पेंटिंग के आईडिया चुरा लिए। हालांकि हुआन इस बात को नकारता है, अपने पूरेपन में नहीं, आधे अधूरे। लेकिन मैं जानती हूँ, वो सच कह रही है, वो जीनियस है, उसके पेंट में दिखता है। एक उलझी हुई क्रिएटिव soul है वो…जो हुआन से इतना प्यार करती है कि लौट लौट कर उस तक आती है, और उसकी जान ले लेने की हद तक पजेसिव है।

बहुत साल पहले, बैंगलोर में मेरा दोस्त रहता था, अभिषेक डेहरिया। मेरी किताब, इश्क़ तिलिस्म का कवर उसने ही पेंट किया है। मैं उसके पेंटिंग स्टूडियो जब भी जाती थी, उसकी अधूरी पेंटिंग देखना मुझे किसी तिलिस्म में जाने जैसा ही लगता था। कई सारे कैनवास इर्द गिर्द। उससे बात करते हुए सोचती थी, उसके भीतर कितने रंग रहते होंगे। वे रंग क्या भीतर से कैनवास पर आते हुए बदलते हैं?

फ़िल्म में बहुत जगह पर हुआन और मारिया स्पेनिश में बात करने लगते हैं, amazon प्राइम के इस एडिशन में उस बातचीत की कोई सबटाइटलिंग नहीं है। मुझे कोफ़्त होती है। लगभग वैसी ही, जैसे क्रिस्टीना को होती होगी, जब कि हुआन बार बार कह रहा होता है कि इस घर में इंग्लिश में बात करो। गुस्से में, प्रेम में, जिम में एक सेट की गिनती गिनते हुए, हम अपनी पहली भाषा तक आ जाते हैं। ये हमारा नेचुरल स्टेट होता है। 

फ़िल्म में हुआन विकी को पेंटिंग दिखा रहा है। ऐब्सट्रैक्ट पेंटिंग्स हैं। मैं सोच रही हूँ, तुम घर पर हो। अधूरे पोस्टकार्ड्स देख रहे हो। डायरीज पलट रहे हो। कोई किरदार है। तुम्हारे जैसा, तुम से इंस्पायर्ड। तुम्हारे शर्ट्स पहन के घूम रहा है मेरी कहानियों में। मैं उलझती हूँ तो सीधे पूछ लेती हूँ, लेकिन सीधे सवाल का सीधा जवाब कोई किरदार नहीं देता। ‘मुझसे मिलते तो हो तुम्हारा दिल नॉर्मल धड़कता है या थोड़ा ज़्यादा तेज़ रफ़्तार? मेरा दिल कभी तुमसे मिलने के पहले नॉर्मल नहीं रह पाता। मैं चाह कर भी गाड़ी धीरे नहीं चला पाती। मुझे लगता है उड़ते हुए आऊँगी तो समय बहुत मिलेगा…एक मिनट एक्स्ट्रा भी सही।’

प्लेन आसमान में है।
मैं कहाँ हूँ? और तुम्हें जो चिट्ठियाँ भेजनी थीं, वे कहाँ पर हैं? 

दिक़्क़त ये है कि विकी क्रिस्टीना बार्सिलोना रोमांटिक फ़िल्म नहीं है, मुहब्बत की परिभाषाएँ तलाशती, क्रिएटिव लोगों की ज़िंदगी में किसी किरदार की तरह खुलती उलझती फ़िल्म है। मैंने देख तो ली है, पर अब इसके बारे में बात किससे करूँ, सो नहीं समझ आ रहा। 

स्पैनिश अभिनेता जेवियर बारडेम मुझे बहुत पसंद है। टिपिकल मैस्कुलिन ब्यूटी के हिसाब से नहीं, लेकिन एक स्ट्रेंज rawness है, जिसके बारे में कहते हैं, कि हैंडसम नहीं, लेकिन कहीं न कहीं अटकने वाला किरदार। मिस्टीरियस। आप उसे खोलना चाहेंगे, समझना चाहेंगे। 

जिस दुनिया में हम जी रहे, वहाँ बहुत ज़्यादा इंटेंसिटी से जीने वाले लोग माइनॉरिटी में हैं। क्यों होना ज़्यादा इंटेंस जैसे सवालों का कोई अर्थ नहीं। इंटेंसिटी हमसे पूछ कर नहीं आती। कोई अच्छा लग जाता है तो चुभ जाता है उसका होना हमारी टाइमलाइन में। हम उसे कहाँ कहाँ नहीं भुलाना चाहते हैं। लेकिन वो लौट लौट आता है।

इस शहर की तन्हाई मुझे बेतरह तोड़ती है। ऐसा पिछले कई साल से हो रहा है। पता है, डिज़्नीलैंड में एक नियम है। कि डिज़्नी के किरदार, जैसे कि सिंड्रेला या बाक़ी राजकुमारियाँ भी, किसी बच्चे को हग करेंगी, तो तब तक हग किए रहेंगी जब तक वो बच्चा अपनी बाँहें न हटा ले। ये नियम पूरी दुनिया में लागू होना चाहिए। कि जिसने hug initiate किया है, ख़त्म भी वही करे। लेकिन ऐसा होता तो नहीं। Hugs are fleeting. Love is not. दोस्तों को भी समझ नहीं आता कि भीतर कोई ग्लेशियर है, उसे पिघलने में वक्त लगता है। Tight hugs. For as long as you want. बेशक़ीमत चीज़ है, किसी मॉल में नहीं मिलती।

एयरप्लेन में लिखा था शायद इस पोस्ट को, मोस्टली।
प्लेन हवा में है। लेकिन जाने क्यों, दिल डूब रहा है।

No comments:

Post a Comment

Related posts

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...