19 May, 2026

Your name is a question, drilled on my heart

मुझे दुखता ये नहीं है कि वहाँ पर एक तारामाछी है। दुखता ये है कि तारामाछी पर अकेले बैठना एक स्ट्रेंज दुख है, दिल के आसमान पर उगता हुआ। ये दुख दूर से दिखता है, ये दुख चाँद सा चमकता है। चाँद को बिना देखे कितने दिन जिया जा सकता है?
पता नहीं कितने दिन चलेगा मेला और कब जाएगा ये तारामाछी मेरे पसंद के रास्ते से हट कर कहीं और…

चेर्नोबिल डिजास्टर के कई साल एक फोटोग्राफर ने वहाँ की तस्वीरें खींचीं। मुझे उसमें एक पोस्टकार्ड याद रहा, फ़िरोज़ी बैकग्राउंड पर लाल तारामाछी, मैंने कहाँ देखा था, वो याद नहीं। उसे बचाये रखने को मैंने उसे इश्क़ तिलिस्म में बुना था…मुराकामी के एक नावेल में भी तारामाछी है…थ्री ऑफ़ अस फ़िल्म में भी…आख़िर को वे तारामाछी पर साथ में जाते हैं…याद की आख़िरी किनार का ये चमकता लम्हा क्या डिमेंशिया की धुंध में उसे दिखेगा? मैं नहीं जानती। 

इस शहर में मेरे जाने की जगहें लगभग फिक्स हैं और उन जगहों पर जाती हुई तमाम सड़कों में भी अपनी पसंद की सड़कें फिक्स हैं…इन रास्तों पर बहुत कम चीज़ें बदलती हैं…दो दशक होने को आए। कुछ बदलता भी है तो, धीरे-धीरे। किसी इमारत का टूटना, किसी पेड़ का कटना, किसी मैदान को समतल कर के वहाँ कोई बड़ा सा वेयरहाउस बनाना…ये सब स्लो-मोशन की चीज़ें हैं।

लेकिन कोई तारामाछी अचानक से लग जाता है और हमारा आसमान बदल जाता है, आवाज़ें, मूवमेंट, रंग…सब तेज़ी से बदलता हुआ…हिंडोले पर हँसते, चीखते, खिलखिलाते लोग होते हैं…हम उन्हें देखते हैं और हर बार जब तारामाछी एक पूरी बार अपने एक्सिस पर घूमता है, इश्क़ की दुनिया के एक प्लेनेट पर एक साल बीत जाता है। वहाँ रहने वाले सारे बाशिंदे कई मौसम जी लेते हैं।

फ़िल्म देख रही हूँ, अटोनमेंट…पूरी एक साथ तो मुश्किल से देख पाती हूँ आजकल कोई भी फ़िल्म…समंदर की ख़ुशबू आती है तो वह सैनिक अपने दोनों साथियों के साथ ऊँची घास में बनी पगडंडी पर दौड़ता चला जाता है…समंदर किनारे असंख्य सैनिकों को देखता है, टूटे हुए, फटे पाल वाले जहाज़…थके, लहूलुहान सैनिक…उनके क्रिया-कलापों में कोई तारतम्य नहीं है…कोई एक घोड़ों को गोली मार रहा है, कोई व्यायाम कर रहा है…बहुत से लोग एक प्रार्थना साथ में गा रहे हैं…कुछ गालियों वाला गीत गा रहे हैं…हर ओर सैनिक, टूटे हुए जहाज़, गाड़ियाँ, मलबा, लहूलुहान लोग…और इन सब में, पीछे एक तारामाछी है जो घूम रहा है…यह तारामाछी थिर रहता तो मुझे कुछ नहीं दुखता…लेकिन वह घूम रहा है, इस तहसनहस ज़मीन के आसमान में, गोल-गोल, धीरे धीरे…

ये फ्लैट चाकू नहीं है, कॉन्सेंट्रिक है, किसी स्क्रू की तरह जो किसी ने भोंका है मेरे सीने में और उसे घुमा रहा है घुमा रहा है, गोल-गोल…एक ही दिशा में…सर्कुलर मोशन…जैसे कोई स्क्रू ड्रिल करते हैं दीवाल पर…सवाल क्यों उभरते हैं, क्यूँ दुखते हैं? या कोई अस्फुट वाक्य…I am holding your hand…अंधेरे में लैंडस्केप बदल रहा है, हम कार में हैं…बारिश में धुँधला हो रहा है मन के भीतर का लैंडस्केप भी। वार्म ग्रे कैनवास पर एक पेंटिंग है, कच्चे रंगों से बनी…भीगे कैनवास पर रंग बहने लगे हैं। मैं भूल जाऊँगी इस रात को किसी रोज़? 

मैं फिर से पूछती हूँ, उससे जो अब अजनबी नहीं लगता। तुम्हारी खिड़की से कैसा आसमान दिखता है?

मैं उससे ये भी पूछना चाहती हूँ, आधी दोपहर जब हम साथ बैठे थे, हमने एक्ज़ैक्टली कितने कप चाय पी थी…और कितनी सिगरेट? मेरी ज़िंदगी में सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है। मुझे थिर रखने के लिए कुछ फाइनाइट नंबर्स चाहिए। प्लीज बताओ, भले ग़लत संख्या, लेकिन बताओ, कितने कप चाय, कितनी सिगरेट। 

बाँट के पी गई सिगरेट को क्या फ्रैक्शन में गिनते हैं? 

मैं सोचती हूँ, अचानक से तुमसे पूछूँ, मेरे साथ तारामाछी पर बैठोगे? तुम्हें तारामाछी में डर तो नहीं लगता? लगे तो तुम मेरा हाथ पकड़ लेना, मैं तुम्हारा। ठीक? मुझे अच्छा लगता है तारामाछी, तुम भी। लेकिन अकेले जाने में डर लगता है।

ये मत कहना, कि डरो मत। मैं वैसे भी बहुत कम ही डरती हूँ। थोड़ा सा तो डरना ज़रूरी है जीवन में, नहीं? डर एकदम खत्म हो जाये, तो पता नहीं क्या कर बैठूँगी मैं। जरा सा ज़िंदा बच जाने का डर ही है जो मुझे जिलाए या कि बचाये रखता है। वरना किसी रोज़ तेज रफ़्तार गाड़ी को फ्लाइओवर से कुदा देने का मन हमारे ज़िंदा रहने के लॉजिक पर हावी हो जाता.

***
The heart’s landscape is an optical illusion…built in multiple stages, to defend, to nurture, to look beautiful. To shelter, those that wander in these unchartered territories.
शुरुआत में, हृदय एक खाली मैदान होता है। फिर एक इमारत का ब्लूप्रिंट। नक़्शा।
एक एक ईंट, एक-एक शब्द, एक-एक सपना जुड़ता जाता है और इमारत खड़ी होती है। कई कमरे और कई मंजिलों वाली यह इमारत घर भी हो सकती है, सराय भी। इसके बाशिंदों पर निर्भर करता है कि वे यहाँ कितने वक्त के लिए ठहरना चाहते हैं। 

अक्सर, हृदय कोई अभेद्य दुर्ग नहीं होता। 
इसे घेर कर कोई खाई नहीं खोदते हम…मगरमच्छ नहीं पालते…दीवार पर हथियारबंद सैनिक नहीं बिठाते। तुम्हारी आमद पर तुम्हारे लिए फूल बरसाते हैं आसमान से…

तुमने कोई किला फतह नहीं किया है। 
दिल जीत लेना खेल हुआ करता है, अक्सर।
इसे तहस-नहस कर, आग लगा कर, नेस्तनाबूद कर देना भी। 

It’s a fragile ecosystem.
You don’t have to be cruel, I won’t have you suffer the consequences, just simple indifference would do. No need to bomb my heart. Just, forget to stub out your cigarette. The cinders are enough.

***
***
गाड़ी एक सौ नब्बे छू कर आती है, डर नहीं लगता।
तुम्हारा हाथ छू जाता है जरा सा, गलती से,
डर लगता है।
*** 

छेनी हथौड़ी से ठोक रखा है, तुम्हारा नाम
कलेजे के पत्थर पर, सो डर नहीं लगता
समंदर किनारे, रेत पर तुम्हारा नाम लिखती हूँ
डर लगता है।

***
सिगरेट सी महकती हथेलियों वाले हम
कलाई पे परफ्यूम छिड़कते हैं
डर लगता है
*** 

घर से निकलते हुए,
आईना भी नहीं देखने वाले हम
बस, काजल लगाने लगते हैं
डर लगता है

***
सारे इल्ज़ाम ख़ामोशी से अपने सर लेने वाले हम
तुम्हारे हक़ में जिरह करते हैं
डर लगता है

***
मुहब्बत में एक ही चीज़ माँगते हैं ईश्वर से
तुम्हें कभी भी डर न लगे। 

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