12 August, 2026

तुम कितनी उदास बातें करने लगी हो

लेकिन संगमरमर का दिल बनाना इतना आसान भी नहीं होता।

पता नहीं क्यों तुम्हें आसान लगता है! एक ज़िंदा धड़कते हुए दिल का संगमरमर का क्लोन बनाना इतना भी आसान नहीं होता। दिल की बाहरी दीवारों पर खुदे हुए नाम ही देख लो। असल के दिल में ये नाम एकदम ठीक ठीक दिखते नहीं, धुंधले होते हैं, आउट ऑफ़ फोकस। लेकिन जैसे ही तुम संगमरमर का दिल बनाओगे, सारे नाम एकदम साफ़ साफ़ दिखेंगे, लाल-हरे-नीले पत्थर में inlay वर्क में खुदे हुए। तुम्हें मालूम भी नहीं चलेगा, कब तुम कारीगरों को पूरी दुनिया में भेज दोगे, अलग अलग रंगों के पत्थर चुनने। कोई मूंगा ला रहा, कोई पन्ना, कोई नीलम की ठीक-ठीक पहचान करने में उम्र का इतना हिस्सा लगा चुका है कि उसे काली आँखों वाली महबूबा की आँखें भी नीली ही दिखती हैं।

रंग असल में एक भरम ही तो हैं। वैसे ही जैसे दिल के पत्थर पर बारीक खुदे ये नाम देख कर तुम्हें धोखा होगा कि ‘मुहब्बत’ और ‘हमेशा’ एक वाक्य में ठीक ठीक लगते हैं, होता है इसके ठीक उलट। मुहब्बत सिर्फ़ एक लम्हे को ज़िंदा रह सकती है। कहानियों में। असल जीवन में, ‘मुहब्बत’ और ‘मृत्यु’ एक वाक्य में ठीक लगते हैं। किसी से बहुत ज़्यादा प्यार करने लगोगे तो जान चली जाये, ये बेहतर है। जो नहीं हुआ, वहाँ कई सारे ऑप्शन होते हैं। किसी इमैजिनरी महबूब के साथ दुनिया के कई शहरों की तफ़सील से जाँच की जा सकती है। सच के लोग थक जाते हैं, बोर हो जाते हैं या फिर जाते ही नहीं साथ में।

‘देखो, कोई इमैजिनरी महबूब बनाना मुश्किल है, लेकिन शहर बनाना आसान। मेरे साथ एक इमैजिनरी शहर का नक्शा बनाओगे? Tell me, are you a sea person or a mountain person?’

‘दो ही ऑप्शन क्यों? इतना सा ही भूगोल पढ़ा है तुमने? मुझे न पहाड़ पसंद हैं, न समंदर। मुझे नदियाँ अच्छी लगती हैं और रेगिस्तान।’

‘इतना कंट्राडिक्शन! यार, रेगिस्तान से मुहब्बत करने वाले लड़के को किस तरह से नदियाँ पसंद आती हैं, मुझे समझ नहीं आता।’

‘कायदे से सोचो, तो रेगिस्तान के लड़कों को नदियों से इश्क़ होना लाज़िमी है।’

‘लाज़िमी थोड़ा भारी शब्द नहीं हो गया? इतने क़ायदे क़ानून से कौन चलता है?’

‘तुम चलती हो ना, क़ायदे क़ानून से…बिना अलार्म के सुबह उठ जाने वाली, कभी फ्लाइट-ट्रेन मिस न करने वाली, दोस्तों को मुलाक़ात का समय दे कर बिफ़ोर टाइम आने वाली लड़की हो तुम। तुम्हारे जीवन में तो सब कुछ सही चलना ही चाहिए ना? तो ग़लत क्या है अगर मैं कहूँ कि रेगिस्तान के बाशिंदों को नदियों से इश्क़ है।’

‘लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए ना?’

‘होना नहीं चाहिए क्या होता है यार! मुहब्बत में कौन से रूल्स लगने लगे। अच्छा बताओ, ये जो तुम चलता फिरता सन-डायल बनी घूमती हो, ऐसा कोई छोटा सा यंत्र नहीं हो सकता मेरे भीतर भी। कि भोर के पहले पहर मालूम चले कि दिन होने वाला है और उस तूफ़ान को देख कर समझ आए, इस लड़की से इश्क़ होने वाला है। एक तरह का इश्क़ का अर्ली वार्निंग सिस्टम।’

‘तुम्हें मुहब्बत का वार्निंग सिस्टम चाहिए। उसका फ़ायदा क्या होगा? नहीं गिरोगे मुहब्बत में तुम?’

‘यार, देखो, गिरना तो inevitable है, लेकिन उन दिनों बिना मेहराब वाली छतों पर नहीं जायेंगे, पहाड़ घूमने की प्लानिंग नहीं करेंगे, इन फैक्ट, कोई ऊँची जगह जायेंगे ही नहीं। तो मुहब्बत में गिरेंगे तो सही, लेकिन धीरे। हाथ पांव नहीं टूटेंगे, दिल ही टूटेगा, बस।’
‘बे पागल इंसान, मुहब्बत और लॉजिक एक वाक्य में अगल-बगल नहीं होते। दूर दूर होते हैं।’
‘पास कर दो थोड़ा। और तुम आओ थोड़ा पास और।’
‘कितने पास?’
‘आधे जन्म पास?’
‘ये तो ज़्यादा है। चित्रगुप्त नहीं मानेगा’
‘तुम्हारी रिक्वेस्ट से यमराज रुक जाते हैं, तुम क्या बात कर रही हो! चित्रगुप्त को तुम पॉकेट में लेकर चलती हो’
‘यार, चित्रगुप्त नहीं, कितनी बार समझाया है तुम्हें, वो सिर्फ़ एक चैटबॉट है। मैंने चित्रगुप्त का काम आसान हो इसलिए उसे LLM बना कर दिया था। मैं ट्रबलशूटिंग के लिए उसका एक डिजिटल ट्विन वर्शन अपने फ़ोन में डाल के रखती हूँ।’
‘अब ये ग़लत नहीं है? टेक्नोलॉजी से देवताओं की हेल्प करना, जिन्होंने लिटरली अपने एंटरटेनमेंट के लिए ये पूरी दुनिया बनाई है’
‘तो ये दुनिया उनकी ही तो रहती है। तेरा तुझ को अर्पण, क्या लागे मेरा!’
‘अच्छा, एक काम करो ना, चित्रगुप्त से बोल कर मेरा एक एकदम इंटेंस वाला इश्क़ करवा दो। एकदम इंटेंस। तुम्हारे टाइप एकदम। जान जाने लगी, इस तरह का कोई।’
‘मेरे टाइप इंटेंस? देखो, हम कह रहे थे तुमसे ये सस्ता नशा मत किया करो तुम। तुमको सूट नहीं करता। तुमको मेरे टाइप इंटेंस मुहब्बत हो गई तो एक हफ़्ते सर्वाइव नहीं कर पाओगे अपने ख़ुद की लव स्टोरी। उम्र अगर तुम्हारी मान लो, चालीस साल और बची है, तो अभी अगले हफ़्ते मर जाओगे। बहुत इंटेंस इश्क़ जीने के लिए सब्र चाहिए, कई जन्म तक बिछड़ बिछड़ के मिलने का सब्र और हर दूसरे जन्म में उससे ही फिर से मिल पाने लायक़ भरोसा। इतने भारी भारी शब्द सुन रहे हो। बाद में रोते आओगे मेरे पास ही। तब क्या करेंगे हम!’

‘मरहम पट्टी। जो एक दोस्त का कर्म होता है’

‘कर्म नहीं होगा यहाँ, क्रिया कर्म हो जाएगा तुम्हारा। दिल में गोबर भरा है तुम्हारे। कोई लड़की गोयठा ठोक के चली जाएगी क़िस्मत के दीवार पर। तब से समझा रहे, तुम्हारी बेवक़ूफ़ियों से तुमको बचाने शंकर भगवान अवतार लेकर थोड़े ना आयेंगे। कभी कभी अपना गण-बन भी भेज देते हैं।’

‘यार हमको समझ नहीं आता। तुम्हें ख़ुद को हज़ार बार इश्क़ में गिरना पड़ना है, और हम कह रहे हैं, हमारी एक सेटिंग करवा दो तो तब से ज्ञान दे रही हो, ये नहीं कि अपनी दोस्त का फ़ोन नम्बर दे दो। कि दिल ही तुड़वाना है तो जाओ, इससे तुड़वा लो, हिसाब से तोड़ेगी।’

‘यार, दिल कैसे हिसाब से तोड़ते हैं? मतलब। दिल एक तरफ़, हिसाब एक तरफ़। ऐसे थोड़े ना होता है कि कैलकुलेट कर ली है कि थोड़ा सा दिल तोड़ेंगे, जैसे बहुत सारा दारू पी कर थोड़ा सा लीवर डैमेज होता है। उतना ही, जितना ख़ुद से रीजनरेट हो जाये…ये नहीं कि लिवर सिरोसिस से मर जाओ तुम।’

‘यार मुहब्बत में मौत आए जरूरी थोड़े है। एक्सीडेंट में भी तो मर सकते हैं हम। सोचो, हम जो बचा-बचा कर पूरा जीवन जीते आए कि किसी से इश्क़ में जान न चली जाये, सो हम गलती से किसी ड्रंक ड्राइवर का एक्सीडेंट हो जायें। कितना अफ़सोस होगा तब तुम्हें!’

‘हमको कोई अफ़सोस नहीं होगा। तुमसे ये मुहब्बत मुहब्बत वाला गेम नहीं हो पायेगा। तुम गिरोगे ज़ोर से। तुम्हारा लक्षण सारा वैसा का वैसा है।’

‘कैसा? शहादत वाला?’

‘देखो, इश्क़ में ऐसे प्लान करके नहीं गिरते हैं। कि इस बार हमको गहरा प्यार हो जाएगा, जो भी मिले, उसी से। मुहब्बत के बारे में सबसे मुश्किल बात ये है कि मुहब्बत एकदम से इंडिपेंडेंट एंटिटी है। जैसे तूफ़ान होता है, जैसे सूनामी आता है, जैसे भूकंप से फट जाती है ज़मीन और नदियाँ बदल लेती हैं अपना रास्ता, अचानक से एक रोज़…जैसे कोई पहाड़ से पुकारता है तुम्हारा नाम और तुम्हारी आत्मा शरीर छोड़ कर उड़ लेती है। ये जानते हुए भी कि इस तरह जाने में उसे एक बार हग तक नहीं कर सकोगे।’

‘तुम एंटी-मुहब्बत कैसे हो?’

‘हम रियलिस्ट हैं। मुहब्बत कोई बाँध थोड़े है कि पहाड़ी नदी देखी और सोच लिया, इस ऊर्जा से बिजली निकाली जा सकती है। तुमने कभी सोचा कि कितने गांव जमींदोज होंगे, बिना जाने हुए कि आधे डूबे हुए मंदिरों के ईश्वर उदास रहते हैं। पिछली बार जब डैम बनाया गया था तो गाँव में पानी धीरे धीरे आया। सब कुछ धीरे धीरे डूबा। शिवाले की सीढ़ियाँ। गोसाईघर के ताखे पर रखा हुआ जलता हुआ दीपक। हनुमान मंदिर की ध्वजा का बांस। और आख़िर को मेरा दिल।’

‘विस्थापित गांवों और जंगलों के लोग कहाँ जाते हैं?’

‘जहाँ भी जाते हैं, पर ये सोचो, उनके पास लौटने को कोई जगह नहीं होती। वे कभी अपने बच्चों को नहीं दिखा पाते अपने बचपन का शिवालय। अपने गाँव का कुआँ। दादी का रोपा हुआ आम का बगीचा।’

‘तुम कितनी उदास बातें करने लगी हो।’

‘यार, बताओ, सच में। मुहब्बत कब से ख़ुश होने की बात है?’

‘मुहब्बत हमारे दिल का भूगोल बदल देती है। फिजिक्स के नियम काम करने बंद कर देते हैं। दिल मुहब्बत में या तो डूबता है या जलता है। ऐसा कितना कम होता है कि दिल मुहब्बत में उड़ रहा हो…नाच रहा हो…गा रहा हो। और तुम्हें सब कुछ जानते हुए भी डर नहीं लगता…ये एडवेंचर नहीं है। यहाँ ऑप्शन नहीं रहते।’

‘ठीक है ठीक है। जाने दो। सुनाओ ना कोई कहानी, लेटेस्ट वाली। पिछले इश्क़ में सबसे स्पेशल क्या था?’

‘वो लड़का सिगरेट पीता हुआ भी क्यूट लगता था। हैंडसम नहीं, सेक्सी नहीं, क्यूट।’

‘अच्छा! तुम्हें लड़के क्यूट भी लगते हैं, हमको मालूम ही नहीं था। क्या स्पेशल था उस स्मोकिंग लड़के में?’

‘उस पर गुलाबी रंग अच्छा लगता था…उस रोज़ सिगरेट पीते हुए उसने पिंक कलर की शर्ट पहनी थी. स्पेशल मेरे लिए’

‘स्पेशल. मतलब रंग स्पेशल, सिगरेट स्पेशल और उसके भी ऊपर, तुम स्पेशल…ज़्यादा स्पेशल नहीं हो गया?’

‘हाँ हो गया। उस रोज़, I was god’s favorite girl…मेरा बर्थडे था ना।’

‘तुम तो रोज़ ही गॉड की फ़ेवरिट गर्ल होती हो।’

‘नहीं, मैं गॉड की नहीं, शैतान की फ़ेवरिट गर्ल हूँ। सारे गुनाह वही करवाना चाहता है मुझसे। भगवान जी तो हमको बचाने के लिए जब न तब तिकड़म भिड़ाते रहते हैं कि हम ज़िंदा रहें। जान न दे दें। वरना अगले जन्म में फिर से जीरो से शुरू करना पड़ेगा और बहुत सारा दुख झेलना पड़ेगा। फिर रोना-धोना उनके ही पास करेंगे।’

‘गुनाह की क्या डेफिनिशन है तुम्हारे पास?

‘यार, मुझे ना अफ़सोस करना बहुत बड़ा गुनाह लगता है। वो काम जो हम सच में करना चाहते थे, लेकिन कर नहीं पाये। इंडियन पीनल कोड में किसी धारा के अंतर्गत वो कोई अपराध नहीं है…लेकिन हमारा दिल इतना न दुखता है कि न जीते बनता है न मरते। लेकिन मेरा जाने दो…मेरी कहानियाँ सारी बहुत लंबी हैं। और हमारे पास, ऐज़ यूजअल, वक्त बहुत कम है।’

‘वक्त कम है नहीं, वक्त कम पड़ जाता है। तुम्हारे पास बैठता हूँ तो समय कभी पूरा नहीं पड़ता। हमेशा लगता है बहुत सी बातें बाक़ी रह गई हैं।’

‘है ना, जैसे कोई अच्छी किताब। पढ़ के हमेशा थोड़ा सा और पढ़ने का मन होता है। बुरी किताब ख़त्म करते करते दिमाग़ ख़राब हो जाता है कि काश इसे भी फ़िल्मों की तरह फ़ास्ट फॉरवर्ड करके पढ़ पाते.’

‘फिर कब मिलोगी?’

‘यार, टेलीपैथी से बुला लेना। जिस भी शहर में होंगे, चले आयेंगे, प्रॉमिस।’

‘थोड़ा ज़्यादा मिला करो मुझसे…ज़िंदगी फीकी लगने लगती है तुमसे मिले ज़्यादा दिन हो जाते हैं तो।’

‘बस?’

‘हाँ, सिर्फ़ इतना’

‘ओके’

‘ओके, लव यू, बाय, ज़िंदगी रही, तो फिर मिलोगे ना?’

‘और ना मिले तो?’

‘तो फिर उसको ज़िंदगी थोड़े कहेंगे?’

‘जाओ बे!’
‘आग मत लगाओ। एक सिगरेट से दुनिया जला देने वाले लोग। बारूद के गोदाम के बाहर खड़े होकर सिगरेट नहीं पीते हैं, जरा दूर हटो हमसे।’
रात के दो बजे उसने फ़ोन किया। बिछड़ने के ठीक बाद। दारू लड़के ने पी थी। लेकिन चढ़ी उसको थी, जो designated ड्राइवर रही। गा नहीं, चीख रही थी।
‘हद से ज़्यादा आती है, मुझको मेरी जान तेरी याद। एक तेरे आने के पहले, इक तेरे जाने के बाद!’ 

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