10 October, 2008

आखिरी मुलाकात

कुछ गीत ऐसे होते हैं कि सुनकर जैसे दिल में कोई हूक सी उठने लगती रहती है। बरसों पुराने कुछ बिछडे लोग याद आने लगते हैं, कुछ जख्म फ़िर से हरे हो जाते हैं।
कुछ ऐसा ही है बाज़ार का ये गाना "देख लो आज हमको जी भर के"। हालात, वक्त और बिछड़ने का अंदाज़ जुदा होने के बावजूद सुनते ही कोई पहचानी गली याद आ जाती है, गीली आँखें याद आती हैं, और एक शहर जैसे जेहन में साँसे लेने लगता है फ़िर से।
इश्क होता ही ऐसा है, गुज़र कर भी नहीं गुज़रता, वहीँ खड़ा रहता है। जब कोई ऐसा गीत, कोई ग़ज़ल पढने को मिलती है तो जैसे एक पल में मन वहीँ पहुँच जाता है। जहाँ जाना तो था पर लौट कर आना नहीं था। वो आखिरी कुछ लम्हे जब वक्त को रोक लेने कि ख्वाहिश होती है, किसी को आखिरी लम्हे तक ख़ुद से दूर जाते देखना, अपनी मजबूरियां जानते हुए, ये जानते हुए कि वो हँसते खिलखिलाते पल अब कभी नहीं आयेंगे।
वो आखरी मुलाकात...कुछ ऐसी बातें जो कही नहीं जा सकीं, एक खामोशी, एक अचानक से आई हुयी दूरी...और वही कम्बक्त वक्त को रोक लेने कि ख्वाहिश।

17 comments:

  1. पूजा जी क्या बात है । बहुत ही चुनिन्दा गीत आप लेखर आयी । बहुत बहुत बधाई

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  2. पूजा जैसे कहा है न, इश्क को अगर अंजाम तक ले जाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा.

    यह ग़ज़ल तो मेरी भी पसंदीदा ग़ज़ल में से है. इसे फिर से एहसास करवाने के लिए शुक्रिया. आभी अभी एक ग़ज़ल लिखी है अपने ब्लॉग पर, पढियेगा ज़रूर.

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  3. Pooja ji aapke pas hai kya yeh song agar hai to pls mujhe rohittripathi60@gmail.com par mail kar de.. dhanyawaad

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  4. वाह!! कितनी सुन्दरता का के साथ गीत पेश किया है..वैसे भी यह मेरा एक प्रिय गीत है. आभार.

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  5. बहुत बढ़िया .अच्छा लगता है यह मुझे भी :)

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  6. बहुत सुंदर ! शुभकामनाएं !

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  7. वाह। इस गाने की याद दिलाने और उसे सुनाने के लिए शुक्रिया।

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  8. अरे वाह ! इतना सुंदर गीत ! मजा आगया !
    धन्यवाद !

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  9. लगता है आजकल इसी मूड का चलन है.. दिल कि बात पर भी डा. साहब कुछ ऐसे ही दिख रहे हैं.. आपके यहां भी कुछ ऐसा ही है और भी 2-3 ब्लौग पर कुछ ऐसा ही दिखा.. मेरा भी आजकल कुछ ऐसा ही मूड है और बस इसी मूड के कारण कुछ भी नहीं लिख रहा हूं..
    खैर बाजर सिनेमा के इस गीत को ही नहीं बल्की सभी गीतों को मैं बहुत पसंद करता हूं.. धन्यवाद इसे सुनाने के लिये..

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  10. धऱ गए मेहंदी रचे
    दो हाथ जल में दीप
    जन्म जन्मों ताल सा िहलता रहा मन
    ज्यों िकसी शैवाल सा िहलता रहा मन

    http:\\www.ashokvichar.blogspot.com

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  11. देख लो आज हमको जी भर के ! क्या बात है!

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  12. सही है...बस एक बहाना चाहिए होता है यादों की गलियों में जाने के लिए! ये गीत एक खूबसूरत बहाना है!

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  13. देख लो आज हमको जी भर के
    एक खूबसूरत बहाना है
    धन्यवाद इसे सुनाने के लिये..

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  14. GEET BAHUT HI MARMIK H. PRANTU YOU TUBE KE SONG REGULAR NAHI CHLATE. RUK RUK KAR KCHLTE H. KYA ISKA BHI KOI HAL BATA SAKOGE.
    ABHAR
    RAMESH SACHDEVA
    hpsdabwali07@gmail.com
    09896081327

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  15. आपकी कविताए और लेख पढकर पुराने दिनों में लौट गया । बहुत ही सजीव चित्रण किया है पहली मुलाकात और बारिशें और सवाल जिनके जवाब नहीं और खास तौर पर आखिरी मुलाकात ने तो आँखों में पानी ला दिया। ऐसे खूबसूरत ब्लाग की रचयिता को बधाई।

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