10 April, 2008

मुहब्बत

हवाओं की अल्हड़ सी मस्ती सी

उड़ती फिरूं कभी तितली सी

बाहों में भर लूँ सारा आकाश

और दौडूँ उनमें कभी बिजली सी

चंचल...खिल खिल शोख हँसी सी

चली पवन पगली सी

पहले प्यार की मदहोशी सी

खुशबू सावन की मिट्टी सी

इतराती बलखाती नदी सी

कौन हूँ ये मैं...जिंदगी सी :-) :-)

3 comments:

  1. सुंदर ! मुस्कुराती पंक्तियाँ

    ReplyDelete
  2. बहता हुआ सुंदर ख्वाब…।

    ReplyDelete
  3. ek masoom alhad khyaal...aise hi jeena....

    ReplyDelete

Related posts

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...