26 February, 2011

लौट आने वाली पगडण्डी

मुझ तक लौट आने को जानां
ख्वाहिश हो तो...
शुरू करना एक छोटी पगडण्डी से 
जो याद के जंगल से गुजरती है 
के जिस शहर में रहती हूँ
किसी नैशनल हायवे पर नहीं बसा है 

धुंधलाती, खो जाती हुयी कोहरे में 
घूमती है कई मोड़, कई बार तय करती है
वक़्त के कई आयाम एक साथ ही 
भूले से भी उसकी ऊँगली मत छोड़ना 

गुज़रेंगे सारे मौसम
आएँगी कुछ खामोश नदियाँ
जिनका पानी खारा होगा
उनसे पूछना न लौटने वाली शामों का पता

उदास शामों वाले मेरे देश में
तुम्हें देख कर निकलेगी धूप
सुनहला हो जाएगा हर अमलतास 
रुकना मत, बस भर लेना आँखों में

मेरे लिए तोहफे में लाना 
तुम्हारे साथ वाली बारिश की खुशबू 
एक धानी दुपट्टा और सूरज की किरनें
और हो सके तो एक वादा भी 

लौट आने वाली इस पगडण्डी को याद रखने का 
बस...

21 comments:

  1. सुन्दर कविता.. बेहद कोमल रचना और भाव !

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  2. जीवन की पगडंडियाँ भूल जाने वाले जहाँ पहुँच जाते हैं, उन्हें स्वयं ज्ञात नहीं रहता है। याद रखकर वापस आना सीख लें, अन्ततः वापस वहीं जाना है सबको।

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  3. मेरे लिए तोहफे में लाना
    तुम्हारे साथ वाली बारिश की खुशबू
    एक धानी दुपट्टा और सूरज की किरनें
    और हो सके तो एक वादा भी

    लौट आने वाली इस पगडण्डी को याद रखने का
    बस..

    बहुत खूबसूरती से लिखे एहसास ...

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  4. और एक वादा भी
    लौट आने वाली इस पगडण्डी को याद रखने का बस ..
    बेहद खूबसूरत एहसास !

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  5. इस पगडण्‍डी पर खिलने लगे हैं सिंदूरी और मखमली पलाश.

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  6. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (28-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  7. लौट आने वाली इस पगडण्डी को याद रखने का बस ..
    बेहद खूबसूरत एहसास ! ...बहुत सुन्दर...

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  8. बहुत ख़ूबसूरत अहसास..बहुत सुंदरता से उकेरा शब्द चित्र..बहुत सुन्दर

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  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01-03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  10. गुज़रेंगे सारे मौसम
    आएँगी कुछ खामोश नदियाँ
    जिनका पानी खारा होगा
    उनसे पूछना न लौटने वाली शामों का पता

    बहुत ही प्यारी कविता....

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  11. आत्म-शक्ति से आलोकित रचना ही,
    अमृत बना करती है..

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  12. बड़े ही खुबसुरत ख्यालात है आपके। बेहतरीन कविता। आभार।

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  13. हंसीन अहसासों से सजी रचना

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  14. सुन्दर रचना |

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  15. मन के भावों की सुंदर अभिव्यक्ति

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  16. और हो सके तो एक वादा भी

    लौट आने वाली इस पगडण्डी को याद रखने का
    बस...



    wow..!!!!

    अफ़सोस के देर से आया...
    पढने के बाद मोबाइल पर से हाथ हटाये है ...कही डायल करने लगे थे

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  17. गुज़रेंगे सारे मौसम
    आएँगी कुछ खामोश नदियाँ
    जिनका पानी खारा होगा
    उनसे पूछना न लौटने वाली शामों का पता


    in panktiyun ne man moh liya

    sudnar prastuti

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  18. yearning at its most beautiful and subtle sense... soft and evocative... I enjoyed it so much.
    Lovely.

    ॐ नमः शिवाय
    Om Namah Shivaya
    http://shadowdancingwithmind.blogspot.com/2011/03/whispers-winter-dew.html
    Twitter @VerseEveryDay

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