18 September, 2011

किस्सा नए लैपटॉप का- १

 इधर कुछ दिनों में हमारे कई ब्लॉग मित्रों के लैपटॉप वृद्धावस्था को प्राप्त होकर शनैः शनैः स्वर्गवासी हो गए...न न सच में किसी ने उन्हें स्वर्ग में इश्वर के इस्तेमाल के लिए नहीं भेजा...वे घर में ही कोमा में पड़े हुए हैं. 

चार-पाँच साल ही एक लैपटॉप की उम्र होती है अक्सर, तो हम कह सकते हैं ये की ये लैपटॉप अपने कर्तव्य का निर्वाह करके रिटायर हुए हैं...सालों तक ये हमारे साथी रहे...सुख-दुःख में साथ निभाया...झगड़े टंटे में डटकर साथ दिया. मेरे लैपटॉप का जाना तो एकदम मानवीय था...पहले एक अक्षर ने साथ छोड़ा 'O' ने...हमने इसे कॉपी पेस्ट करके कुछ दिन काम चलाया...मगर ब्लॉग लिखने में घोर असुविधा होने लगी तो लिखना काफी कम भी हो गया...फिर हमने एक नया कीबोर्ड ख़रीदा...अब लैपटॉप डेस्कटॉप की तरह काम करने लगा था. पर जैसा की आप जानते हैं, उम्र बढ़ने पर रफ़्तार कम होते जाती है, तो नए कीबोर्ड में कुछ टाईप करके उसके स्क्रीन पर उगने का वैसा ही इंतजार होता था जैसे सदियों १६ की उम्र में उस मोहल्ले के खूबसूरत लड़के के बालकनी पर आने का. 

इस बीच हमें उधर के मैक पर काम करने का मौका मिला...हम एकदम बुरी तरह उसपर फ़िदा हो गए. उसकी स्क्रीन रिसोलुशन का वाकई कोई लैपटॉप बराबरी नहीं कर सकता...और प्रोसस्सिंग स्पीड भी बेहतरीन थी. कुछ दिन ही इस्तेमाल करते हुए कई परेशानियाँ आयीं...हमेशा से विंडोस का ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करने पर आप अपने लैपटॉप से कुछ चीज़ों की उम्मीद रखेंगे...यहाँ हर चीज़ को फिर से सीखना पड़ रहा था. हिंदी टाइपिंग के लिए मैं गूगल ट्रांसलिट्रेट डाउनलोड करके रखती हूँ...पर मैक के लिए वो उपलब्ध नहीं था. गूगल चैट भी मैक के लिए नहीं बना था...ये तो दो छोटी परेशानियाँ आयीं मगर इनका निकट भविष्य में कोई समाधान नहीं दिख रहा था. मैक में हिंदी टाइपिंग का अपना कीय्बोर्ड है...और कुछ अभ्यास के बाद शायद उसमें टाईप करना आसान हो ये सोच के हमने कोशिश भी की, लेकिन उसमें अक्सर दो की(Key) एक साथ दबानी पड़ती थी. इससे हमारी नाज़ुक उँगलियों को परेशानी होती थी. इन दो बड़ी परेशानियों के अलावा भी कई छोटी मोटी दिक्कतें हुयी मुझे. तो मैंने अपने लिए मैक लेने का इरादा स्थगित कर दिया. 

एक नयी कॉफ़ी टेबल बुक लिख रही हूँ आजकल...कर्नाटक बस परिवहन के लिए. इस सिलसिले में उनके लाल बाग़ स्थित ऑफिस पर रोज जाना पड़ रहा था...अब बिना लैपटॉप काम कैसे करें. मेरे लैपटॉप ने मेरे मैक इस्तेमाल करने से सदमे में आ गया था. अब उसका 'A' भी काम करना बंद कर चुका था. एक दिन किसी तरह ctrl+v करके काम चलाया पर शाम होते होते ctrl भी बंद हो गया. इस तरह तीन चरण में मेरे लैपटॉप को पूरा लकवा मार गया. 

अब मैंने तीन लैपटॉप फाइनल किये...Sony Vaio, Dell Inspiron and Mac...सबसे पसंद मैक था लेकिन पहले वाली समस्या के कारण उसे आउट किया...हालाँकि कई बार कनखियों से उसे देख लेती थी. सोनी वायो पर मेरा दिल बहुत साल पहले आया हुआ था...जब पहली बार सोनी ने लाल रंग के लैपटॉप मार्केट में उतारे थे. खैर...फिर डिटेल जानकारी जुटाई.

३०-४० का बजट सोचा था. उसमें एक सोनी का लैपटॉप भी पसंद आया पर उसका प्रोसेसर इंटेल-३ था...और आजकल इंटेल ५ और ७ आ चुके हैं. फिर पुराने प्रोसेसर लेने का कोई फायदा नहीं लगा. तो अब बेसिक चाहिए था इंटेल ५, ४ जीबी रैम और ५०० जीबी हार्ड डिस्क. मुझे मेरे लैपटॉप में हमेशा मेरे पसंद की फिल्में, बहुत से गाने और बहुत सी तसवीरें चाहिए होती हैं, और साल दर साल ये स्टोक बढ़ता ही जाता है. तो ३२० से मेरा काम नहीं चलता. 

इन स्पेसिफिकेशन पर जो फाइनल किया वो था सोनी वायो VPCCB15FG/B और डेल इन्स्पिरोन. पोस्ट काफी लम्बी हो गयी है इसलिए दो पार्ट में बाँट रही हूँ...अगला पार्ट यहाँ है. 

7 comments:

  1. हमारे ५ वर्ष पुराने तोशीबा जी अभी भी स्वस्थ हैं, अब घर में ही रहते हैं, पुरानी अवस्था से नये में ले जाने के लिये पूर्ण सहयोग भी कर रहे हैं। मैक में जाना एक निर्णय था जिसके परिणाम आने शेष हैं। बहुत सीखना है पर प्रगति अच्छी है।

    वाह मेरी दूसरी पसन्द आप वाला मॉडल ही था।

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  2. @प्रवीण जी, आपके तोशिबा जी लगता है बहुत फ्लेक्सिबल प्रवित्ति के हैं :) ज़माने की रफ़्तार के साथ बदलाव में सहयोग करते हैं. मेरा भी पुराना लैपटॉप तोशिबा ही था. अब बेहद स्लो हो गया है. मैक का इस्तेमाल चुनौती है, लेकिन वाकई उससे बेहतर लैपटॉप अभी मार्केट में नहीं है. एयर की सबसे बड़ी खूबी उसका कम वजन है...कंधे भी आपको शुक्रिया कह रहे होंगे. :)

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  3. बहुते बड़ा वाला धन्यवाद! हमारी और से for गूगल ट्रांसलिट्रेट......वाकई में लाजवाब चीज़ बाय .....हमरे खातिर.......सुनते ही लोड कर मारा है...गूगल देवता की सहायता से..
    धन्यवाद!

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  4. :) :) :)

    मेरे भी लपेटिया यंत्र का सबसे पहले O ही बेखबर हुआ था.
    लेकिन जरा सा नखरे दिखाने पर जम अपना दम लगाता हूँ तो O निकल के बाहर आ जाता है. ;)

    अभी तो वो दिन नही आये कि हमें बालकनी की जगह खिड़ाकी पर आने वाली उस लड़की जैसा इन्तजार करना पड़े.. :P :P

    लेकिन स्पीड कम हो रही है.. इसके चलते एक मिनी ले लिया है.. Acer Aspire One.. जो इतना उपयोगी है कि रजाई के भीतर बैठ के आराम से ब्लॉगिंग की जा सकती है.. ;) मैक का तो कोई जवाब नही.. लेकिन लिनक्स और विंडोज का एक साथ वाला लालच मैक की तरफ जाने नही देता..

    और एक त्रुटि - ४०० जीबी रैम की जगह ४ जीबी रैम.

    हार्डडिस्क की उपयोगिता सिर्फ फिल्में रखने के लिए ही होती हैं.... HD Bluray movies.. :)

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  5. आगे वाला पार्ट रहस्यमयी है!!? हिन्दी फिल्मों की तरह? ;)

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  6. मेरे अनुसार तो मैक ही लेना चाहिये.. क्योंकि इस पर विंडोज लिनक्स जब मन करे तब इस्तेमाल कर सकती हैं.. वर्चुअल बॉक्स के माध्यम से..

    फिर भी पसन्द अपनी अपनी!!

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