22 December, 2010

तुम्हारे आने का कौन सा मौसम है जान?

जान...आज जाने कितने साल हो गए तुम्हें एक नज़र देखे हुए. अभी अभी लॉन्ग ड्राइव से लौटी हूँ. ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपाइर होने वाला है, उसको रिन्यू कराने के पहले के कई सारे कागजातों का पुलिंदा है, मेडिकल सर्टिफिकेट है, इन सबके बीच कमजोर होती नज़र है...उम्र का तकाजा वाले कुछ मूड स्विंग्स हैं.

सोचती हूँ कि इस लाइसेंस के ये आखिरी दिन थोड़ी दूर तक ड्राइव करती चली जाऊं, कौन जाने किस शहर में, किस ट्राफिक सिग्नल पर तुम दिख जाओ. जबसे तुमने मना किया है गाड़ी तेज नहीं चलाती हूँ. वैसे तो मेरा आज भी मानना है कि मुझे अगर किसी ट्रैफिक एक्सीडेंट में मरना होगा तो पैदल चलते हुए मरूंगी, गाड़ी चलाते हुए नहीं. पर क्या करूँ, जाते हुए तुम्हारा आखिरी फरमान जो था...गाड़ी ठीक से चलाना. सोचती हूँ, तुम्हें पता होगा क्या कि वो हमारी आखिरी मुलाक़ात होगी? बोलना ही था तो कुछ अच्छा कहते...अपना ख्याल रखना, मैं तुमसे हमेशा प्यार करता रहूँगा, मुझे याद तो रखोगी न टाइप कुछ...मगर गाड़ी ठीक से चलाना?! ये कोई बात है आखिरी मुलाक़ात में कहने की.

कार अब तक जाने कितनी दूर आ चुकी है...शायद उतनी ही जितनी मैं खुद, जितनी दूरी मेरे तुम्हारे बीच खिंच गयी है कुछ उतनी? आजकल मौसम में ठंढ बहुत बढ़ गयी है और मैंने एक बार अपनी तबियत का ख्याल न रखते हुए(तुम्हें याद तो है न तुमने मुझे अपना ख्याल रखने नहीं कहा था?) मैंने खिड़की के शीशे उतार दिए. गाल लगभग सुन्न ही हो गए थे...चश्मे पर भी भाप सी जमने लगी थी. आँख के आंसू हवा में घुलने लगे थे और कार के शीशे पर भी पानी की नन्ही नन्ही बूँदें ठहरने लगी थीं.

घर पर हूँ और सोच रही हूँ कि आज के सूचना और टेक्नोलोजी के ज़माने में ऐसा कैसे मुमकिन है कि कहीं तुम मुझे ढूंढ ना पाओ. जिस जमाने में ये सब कुछ नहीं था तब भी तुम मुझे ढूंढ निकालते थे...याद है वो नए साल का सरप्राइज जब तुम हॉस्टल की दीवारें फांद कर बस मुझसे मिलने आये थे एक लम्हे के लिए बस. वो लिफ्ट में जब तुमने कहा था 'किस मी' तुम्हें याद है कि चलती लिफ्ट के वो भागते सेकंड्स जब भी याद करती हूँ हमेशा स्लो मोशन में चलते हैं.

बहुत साल हो गए जान...अफ़सोस कि मैं एक स्त्री हूँ इसलिए ये नहीं कह सकती...कि जान मैंने सात पैग व्हिस्की पी है, दो डब्बे सिगरेट फूंकी है और तब जा के कहने की हिम्मत कर पायी हूँ...काश कि ऐसा होता मेरी जान. पर मैंने कोई नशा नहीं किया है...तुम्हारी याद को ताउम्र जीते हुए, आज इस सांझ में तुम्हारी आँखों में आँखें डाल कर कहना चाहती हूँ 'मुझे लगता है मुझे तुमसे प्यार हो गया है जान...काश तुम सामने होते तो तुम्हारे होठों को चूम सकती'.

Some people come in your life for a reason, some people come in life for a season and some people come in your life for-ever.

'तुम्हारी बहुत याद आती है जान...किसी रोज आ जाओ अब...बहुत कम जिंदगी बाकी है'

13 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर :)

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  2. मुझे तो लगता है अभी बहुत लम्बी उम्र पड़ी है आपके पास, बरहहाल बहुत ही सुन्दर शब्दों का प्रयोग है आपके इंतज़ार में!

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  3. आज की पोस्ट पढ़ के ये गाना बहुत याद आ रहा है पूजा... "तेरे जाने की रुत मैं जानती हूँ, मुड़ के आने की रीत है के नहीं... फिर से अइयो बदरा बिदेसी तेरे पंखों पे मोती जड़ूँगी..."

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  4. साहित्य-सृजन उफान पर है, जानलेवा है कि जानदेवा। :)

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  5. एहसास बहुत खूबसूरती से शब्दों में समेटे हैं ...

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  6. उम्र का लम्बा हिस्सा करके दानाई के नाम
    हम भी अब सोच रहे है पागल हो जाए
    - शहरयार

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  7. Something which has da power to steal u frm urself.. lovely line.. each line filled me wid a synergy .. keep writing :)

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  8. Some people come in your life for a reason, some people come in life for a season and some people come in your life for-ever.




    Very nice lines..

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  9. मौसम आएँगे, जाएँगे
    हम तुमको भूल ना पाएँगे
    टाइप्स

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  10. बड़ी ही मारक पोस्ट है.....
    कितनी दुखती रगों को छेड़ गयी होगी...

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  11. मुझे भी वही गाना याद आ गया "फिर से आयो बदरा बिदेसी"
    एक हूक सी उठी इस पोस्ट को पढ़कर... एक टीस, जो पहले प्यार को सोच-सोचकर ज़िंदगी भर उठती रहती है सीने में.

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  12. chahe yah personal ho ya na ho but its realy beautyful n touchy....

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  13. आज उपस्थिति जताने को बाध्य कर ही दिया!
    क्यों?
    बता सकता हूँ लेकिन...
    कुछ बातें चुप रहने के लिए होती हैं।

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