30 July, 2009

इंतज़ार और सही...

हमेशा मेरे हिस्से ही क्यों आती हैं
याद वाली सड़कें...जिनपर साथ चले थे
बेतरह तनहा सा लगता है वो मोड़
जहाँ हम मिलते थे हर रात
घर तक साथ जाने के लिए...

हमेशा मैं ही क्यों रह जाती हूँ अकेली
घर के कमरों में तुम्हें ढूंढते हुए
नासमझ उम्मीदों को झिड़की देती
दरवाजे पर बन्दनवार टाँकती हुयी
इंतज़ार के दिन गिनती हुयी

हमेशा मुझसे ही क्यों खफा होते हैं
चाँद, रात, सितारे...पूरी रात
अनदेखे सपनों में उनींदी रहती हूँ
नींद से मिन्नत करते बीत जाते हैं घंटे
सुबह भी उतनी ही दूर होती है जितने तुम

हमेशा तुमसे ही क्यों प्यार कर बैठती हूँ
सारे लम्हे...जब तुम होते हो
सारे लम्हे जब तुम नहीं होते हो


27 comments:

  1. wow
    nice one
    lagta hai kisi ne bahut gahri chot di hai...
    khair.. khuda kare aap isi tarah likhti rahen...
    thanx

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  2. sorry!
    aapki maa wali kavita se mujhe kuchh kuchh gulzaar ki ek poem yaad aa gayi.. ''sarhad paar se''
    mera ek friend aksar sunaya karta tha..

    haan waise vichar aapke apne hain....

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  3. यादों को याद करती हुई अच्छे भाव की रचना।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  4. लड़की ....वाला गीत डॉ कुंवर बेचैन का है. उनका पता उसी गीत के कमेंट्स में देखें . अजय मलिक

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  5. ajay ji, bahut shukriya...kab se is geet ke lekhak ko dhoondh rahi thi.
    hriday se aabhari hoon.

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  6. यदि संभव हो तो hindiforyou.blogspot.com देखें.
    अजय मलिक

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  7. बहुत खूबसूरत.

    रामराम.

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  8. हमेशा मुझसे ही खफा क्यूँ होते हैं :)
    बहुत अच्छी लिखी है कविता ...भावों से भरी ...

    तो जनाब आजकल कहीं गए हुए हैं क्या ...कहीं बहार ...विदेश

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  9. हमेशा मेरे हिस्से ही क्यों आती हैं
    याद वाली सड़कें...जिनपर साथ चले थे
    बेतरह तनहा सा लगता है वो मोड़
    जहाँ हम मिलते थे हर रात
    घर तक साथ जाने के लिए...

    खुबसुरत इन्तजार है ।

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  10. pichli 5-6 posts se hamari Puja wapas aa gayi hai :) aap hamesha se pyara aur dil ko chune wala likhti hai :) God bless you keep writing

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  11. लास्ट की दो लाईन.. मास्टरपीस है..

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  12. bahut saare kyun kaa koi uttar nahin hotaa dost... sunder rachnaa...

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  13. DD india पर आज रात 11.00 से 11.30 के बीच डॉ कुंअर बेचैन के मंच पर 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह की दो तीन मिनट की झलकियाँ देखी जा सकती हैं . उनका पता है- "II एफ-51 नेहरु नगर , गाजियाबाद -201001" तथा उनका मोबाइल नंबर है 09818379422 .
    ajai4all@gmail.com

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  14. क्यों न हो ? लम्हे की अथ-इति विलयित जो हो गयी है प्रेम-राशि में ।

    तीव्र संवेदनात्मक रचना । आभार ।

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  15. बेहतरीन--उम्दा भावपूर्ण रचना! बधाई ले लो. :)

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  16. अच्छी कविता दर्द भी और प्यार भी... इंतजार ये चीज़ ही ऐसी है...

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  17. बहुत ही गहरे भाव लिये हुए है आपकी ये कविता रूमानी पर दर्दीली ।

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  18. apne apne hisse ka gam hai, mushkil yeh hai ki us ke hisse ka bhi khud hi jeena padta hai !!

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  19. ek bahut hi achi kavita ..yaade taaza ho rahi hai ....aabhar sweekar karen.

    vijay

    pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

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  20. फिराख गोरखपुरी साहब ने कहा हैं "कही वो आके मिटा ना दे ,इंतज़ार का लुत्फ़ कही कूबुल ना हो जाए इल्तज़ा मेरी ....................

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  21. एक बार फिर अगर समय हो तो www.hindiforyou.blogspot.com देखें.

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  22. Dard itni khubsoorat kavita bhi ban sakta hai...pehli baar jaana.

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  23. अहा! एक और सुंदर इंतज़ार!

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  24. नींद से मिन्नत करते बीत जाते हैं घंटे
    सुबह भी उतनी ही दूर होती है जितने तुम

    umda khayal......

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