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04 February, 2010

जरूरत है एक अदद फोन की

बहुत दिन हो गए हमने अपना फोन नहीं बदला है, जब ख़रीदा था तो सोचा था कि साल के अंदर बदल लेंगे. और देखते देखते तीन साल होने को आये. वक्त के साथ मेरी जरूरतें भी बदली, प्राथमिकताएं भी और ध्यान ही नहीं गया कि इस मुए फोन का और कोई इस्तेमाल भी है.

अभी भी याद आता है वो नयी नयी सैलरी से फोन खरीदना, वो वक्त था जब पहली रिक्वायरमेंट थी कि फोन दिखने में खूबसूरत होना चाहिए. कहीं रखा रहे तो लोग उठा के देखें. और वाकई उस वक्त ये फोन इतना खूबसूरत दीखता था कि बस दिल आ जाए. दुष्यंत कुमार का शेर याद आता था “किसी जंगल में आग लग जाए, हम कभी इतने खूबसूरत थे”, खैर ये शेर खुद के लिए बोलने लायक तो हम कभी न हुए, अलबत्ता फोन जरूर ऐसा लिया था.

वक्त बीतते कब इन्टरनेट जीवन का ऐसा हिस्सा हो गया पता ही नहीं चला. ब्लॉग जब सबसे पहले लिखा था तो रोमन में हिंदी लिखी थी, उस वक्त IIMC में पढते थे और देवनागरी में लिखने का काम हमारे यहाँ सिर्फ हिंदी जर्नलिस्म के छात्र कर पाते थे. हम बड़ी हसरत से देखते थे वो कीबोर्ड पर कभी सीखने कि हिम्मत न कर सके. कुछ बहुत जरूरत हुयी तो किसी से सिफारिश कर दी लिखने की. भले लोग हुआ करते थे, हमेशा मान जाते थे.

अब फोन लेना है तो सबसे जरूरी है ये देखना कि उसमें इन्टरनेट कैसे चलता है, उसपर दूसरी जरूरी चीज़ कि हिंदी वेबसाइट कैसे खुलती है, और हिंदी में लिखना कैसे होता है. क्या ठीक ठाक हो जाता है या कुछ इंतज़ाम करना होता है. कुछ लोड करने या बदलने के मामले में हम अभी तक तकनीकी अपंग हैं. इतने दिन हो गए एक हिंदी फॉण्ट कैसे लाना है फोन में नहीं समझ पाए.

मुझे इस समस्या का जहाँ तक समाधान दीखता था वो ये था कि नोकिया का ही कोई फोन खरीद लूं, हिंदुस्तान के लिए बने फोन में हिंदी बाय डिफाल्ट रहता है तो कोई चिंता नहीं होगी. पर एक दिन नोकिया का एक्सप्रेस म्यूजिक फोन देखा तो उसमें सारी भाषा कि टांग टूटी हुयी थी. मात्राएं एकदम आवारा, किसी का कुछ ठिकाना नहीं...हम घबराये, नैय्या डूबती नज़र आई.

यूँ मुझे सैमसंग कार्बी बड़ा पसंद आया है, उसके पहले एचटीसी टच अच्छा लगा था...पर इन दोनों फोन के बारे में मुझे ये नहीं पता चल पाया कि हिंदी फॉण्ट सपोर्ट है कि नहीं. पूछने पर यहाँ बंगलोर में दुकान पर बंदे ने ऐसे घूर के देखा जैसे कि मैंने सैमसंग कि शॉप में नोकिया का कोई मोबाइल मांग लिया हो...खैर भूल चूल माफ.

आपमें से कई लोग अपने मोबाइल का इस्तेमाल ब्लॉग्गिंग के लिए करते होंगे, क्या मुझे एक फोन सुझा सकते हैं?

02 February, 2010

सबसे अच्छा ऑफलाईन हिंदी टूल आ ही गया :)

ऑफलाईन टाइपिंग के अच्छे टूल की बहुत दिन से तलाश थी, क्योंकि ऐसा कई बार होता था की कुछ लिखने का मन करता था पर इन्टरनेट नहीं होने के कारण नहीं लिख पाती थी. यहीं नहीं कई बार ऐसी जगह जहाँ इन्टरनेट न हो लिखना ही बंद हो जाता था. और एक बार हिंदी के लिए देवनागरी देखने की आदत लगने के बाद रोमन देखना एकदम बर्दाश्त से बाहर हो जाता है. पर मुझे यकीन नहीं हो रहा की फिर से गूगल सहायता के लिए आया है. मैंने पहली बार २००५ में ब्लॉगर पर हिंदी की ये सुविधा देखी थी और तब से हिंदी को रोमन में लिखना लगभग बंद ही कर दिया है. यही नहीं आदत अब वाकई ऐसी पड़ गयी है की रोमन में लिखा कुछ पढ़ने पर दिमाग पर बहुत जोर पड़ता है और अक्सर मैं नहीं ही पढ़ती हूँ.

तो आज गूगल के भले काम को प्रोत्साहन देने के लिए ये पोस्ट. मैंने इससे पहले बारहा पर लिखने की कोशिश की थी, पर वो असंभव रूप से कठिन था, उसपर लिखना एक तरह से सारी वर्णमाला फिर से सीखने के बराबर लगा मुझे. तो मैंने बारहा के बारे में सोचा भी नहीं, कट पेस्ट से काम चल ही जाता था. बस कभी कभार अखर जाता था.

कुछ पोस्ट्स में हिंदी में कमेन्ट लिखने के लिए पहले गूगल ट्रांसलिटरेट खोल के रखना जरूरी हो जाता था. कई बार ऐसा भी होता था की काम के सिलसिले में कुछ लिखना हो और इन्टरनेट बहुत धीरे चल रहा होता है. उस वक्त एक अच्छे ऑफलाइन टूल की बहुत जरूरत लगती थी.

आप भी देखें, इसको डाउनलोड करना बहुत आसान है और सेट उप भी, क्योंकि मुझे कोई भी दिक्कत नहीं आई. आप इसे यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं. मुझे पूरी उम्मीद है की मेरी तरह तकनीकी दृष्टि से कमजोर लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.

कुश से बात कर रही थी, तो पुछा उसने की फ़ोकट का प्रचार कर रही हो की पैसे मिल रहे हैं J काश मिलते, पर नहीं मिल रहे हैं. हो सकता है एक आध दुआओं का टोकरा इधर आ गिरे...मेरे इस भले काम के लिए.

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