01 July, 2012

आसमां की रेत-घड़ी


Meet me in July...
कभी एक कहानी लिखने बैठी थी जिसमें मॉनसून था...लड़का था एक...टपकती छतों के नीचे खड़े होकर कुल्हड़ में चाय पीती लड़की थी...भीगे दुपट्टे से छूटा रंग था...कागज़ की नावें थीं...बोतल में बंद चिट्ठियां...अब बस शीर्षक रह गया है...बाकी पूरी कहानी धुल गयी.
#तुम्हारे लिए
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Of delays and more...
क्या कुछ नहीं आता लौट कर...मॉनसून भी तो हर साल आता है...बस एक साल देर से आया थोड़ा...उसी साल मेरे जन्मदिन पर तुम मेरे शहर में नहीं थे. तो बारिशें भी तुम्हारे साथ लेट दाखिल हुयीं थी जिंदगी में. करीने से लगे क्रोटन के पौधे पानी में भीगते हुए उदास हो गए थे...महीने भर से तुम्हारे इंतज़ार में मेरा दुपट्टा भी कुछ कुछ फीका होने लगा था. तुमने तो वादा किया था न...मेरे जन्मदिन पर आओगे...मैंने तो याद भी दिलाया था तुम्हें...तुम भूल गए...तुम व्यस्त थे. वैसे एक बात बताऊँ...हम जिनसे प्यार करते हैं न...उनके लिए वक्त हमेशा होता है हमारे पास. 
#बिसरते हुए
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Yes. I miss you. 
यूँ तो सब कुछ बदल गया है. मेरी जिंदगी में कायदे से तुम्हारी यादों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. मैं टाईमपास थी न तुम्हारे लिए. फुर्सत होती, माहौल होता, मूड होता तो तुम्हारी जिंदगी में मेरी जगह होती...गलती मेरी कहाँ थी...प्यार ऐसे ही होता है. तुम्हारी याद लेकिन बेहद बदतमीज है...ऑफिस टाइम में आने के पहले दरवाजा नहीं खटखटाती...फोन के पहले मेसेज करके पूछती नहीं कि फुर्सत है? तुम्हारी यादें मुझपर इतना हक जताती हैं जितना तुमने भी कभी नहीं जताया. फ़िल्टर कॉफी...कोल्ड कॉफी...कॉफी विद आइसक्रीम...सब कुछ तो है.
बस. तुम्हारे बिना कुल्हड़ वाली चाय में सोंधापन नहीं लगता. 
#दोराहे   
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Some goodbyes are forever.
ट्रेन के सफ़र में मिले थे हम. मालूम था कि इसके बाद फिर कभी नहीं मिलना होगा. तीन दिन के सफ़र में चार मौसम आये थे. ठंढ, गर्मी, बारिश और पतझड़. हरे खेत थे. जलते पलाश के जंगल. पागल होती नदियाँ. बाँहों में भरता तूफ़ान. हमने एक दूसरे के साथ उतने दिनों में ही एक जीवन भर के सपने देख लिए. एक सफ़र में रजनीगन्धा के पौधे रोपे गए...उनमें फूल खिले और वे फिर जमींदोज भी हो गए. 
सालों बाद फिर कहीं मिले भी तो क्या एक दूसरे को पहचान पाते हम?
#कसक 
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It still hurts.तुमसे प्यार करते हुए जिरहबख्तर नहीं पहना था. तुम जिस्म में कहीं भी चोट दे सकते थे. लेकिन तुमने दिल को चुना. तुम मेरा सर कलम कर सकते थे. तुमने नहीं किया. तुम्हें मालूम है मैं अब तुम्हारा नाम नहीं लेती...बहुत तकलीफ होती है. बेहद. तुम सही कहते थे. तुम नहीं जानते प्यार क्या होता है. तुम्हें समझने के कोशिश में मैं प्यार भूल गयी. आज की डेट में मुझे नहीं मालूम प्यार क्या होता है.
#कुछ भी नहीं 
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मैं बस एक पुरसुकून नींद सोना चाहती हूँ...तुम अंदाजा नहीं लगा सकते मैं कितनी थकी हुयी हूँ...मैं कितनी सदियों से प्यास हूँ...तुम कितने जन्मों से रेगिस्तान.

9 comments:

  1. हम जिनसे प्यार करते हैं न...उनके लिए वक्त हमेशा होता है हमारे पास.

    No one is busy in this world, it's all about priorities.

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  2. ek sher ki tarah dil main utar gaya... hamesha ki tarah ek behtareen post...

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  3. हम जिनसे प्यार करते हैं न...उनके लिए वक्त हमेशा होता है हमारे पास.

    सही है ...
    सुंदर अभिव्यक्ति.

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  4. दिल को हवामहल बना लिया है, कहीं से हवा चले, याद तुम्हारी आ जाती है..

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  5. .मैं कितनी सदियों से प्यास हूँ...तुम कितने जन्मों से रेगिस्तान. …………………अब कहने को क्या बचा

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  6. उड़ान .. उड़ान और उड़ान
    जिस्म में कहीं भी चोट दे सकते थे. लेकिन तुमने दिल को चुना'
    शायद यह वह हिस्सा है जहाँ चोट को शिद्दत से महसूस किया जा सकता है ..

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  7. kafi saare bhawnao ko ek sath piroya hai aapne...shubhkamnaye

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