19 July, 2015

जिंदगी ख़त्म हो जाती है. पूरी नहीं होती. अधूरी ही रहती है हमेशा.

लड़की बैठी है भगवान के पास. सर झुकाए. 'यू नो, यू आर सो ब्लडी यूजलेस, आई डोंट लाइक यू एनीमोर, तुम मेरी जिंदगी से चले क्यूँ नहीं जाते?' भगवान ही शायद इक ऐसा है जो लड़की से ज्यादा जिद्दी है.

तुम उसका नाम भूल गयी हो न. बस इक रंग रह गया है वो तुम्हारी आँखों में. हरा. दुनिया के सारे हरे रंग के शेड्स हैं उसके. सारे. सब समंदर. सारे पौधे. सब. आसमान भी कभी कभी ले आता है कोई रंग का हरा.

सुनो. मेरा क़त्ल कर सकोगे? बहुत हिम्मत की बात करते हो. मेरे दोस्तों में ऐसा कोई नहीं है जिसके हाथ न कांपें. मगर मुझे तुमसे बहुत उम्मीद है. तुम क्या सोचते हो यूथेनेसिया के बारे में? किसी की तकलीफ से किसी को मुक्त कर देना तो सही है न? फिर कहाँ है पैमाना कि शारीरिक दर्द बर्दाश्त न करने पर ऐसा करना चाहिए. ये जो मेंटल पेन है. व्हाट मेक्स इट लेस रियल? मेरी तकलीफ का कोई इलाज भी नहीं है. हाँ मुझे खुद में सुधार करने चाहिए. मुझे योग करना चाहिए. मुझे खुद को काम में बहुत व्यस्त रखना चाहिए. मगर नहीं होता दोस्त. एकदम नहीं होता. तकलीफ इतनी है कि कोई ट्रांक्विलाईजर काम नहीं करता. सुनो. तुम्हें रिवोल्वर चलाना आता है? अच्छा देसी कट्टा? हाँ. मैं इंतज़ाम कर दूँगी. तुम चिंता न करो. मेरे बहुत कॉन्टेक्ट्स हैं. तुम बस वादा करो कि तुम्हारे हाथ नहीं काँपेंगे. बस. 

मालूम. तुमसे बहुत सी बातें करनी थीं. मौत की. जिंदगी की. पहाड़ों की. जिस दिन मेरा व्हीली सीखने का मन किया तुमसे उस दिन बात करने का मन था. बताने का मन था. के तुम समझते. मेरे इस पागलपन को शायद. जानते हो दोस्त. मुझे पूरा पूरा कोई समझ नहीं पाता इसलिए अपने पागलपन के छोटे छोटे हिस्से करके लोगों से बांटते चलती हूँ. जरा जरा हिस्सों में समझते हैं सब मुझे. पूरा पूरा कोई समझ नहीं सकता. समझना भी नहीं चाहिए. शायद इश्वर नाराज़ हो जायेगा. उसकी फेवरिट में हूँ तब तो इतना सारा दुःख लिखा हुआ है किस्मत में. भड़क गया तो जाने क्या करेगा. शायद सारे रकीबों को मेरे शहर में ट्रांसफर दे देगा. 

मगर जान, तुम समझते हो न. मेरी मुसीबत इश्क़ नहीं है. मेरी मुसीबत मैं हूँ. ये जो मन है. जिस पर किसी का बस नहीं चलता. वो मन है. कोई कब तक अपनेआप से लड़ाइयाँ लड़े. थकान हो जाती है. पोर पोर दुखता है. फिजिकली यु नो. तुमने कितना पेन बर्दाश्त किया होगा? थक जाने की हद तक थक जाने के बाद भी शायद चलने का हौसला है तुम में. डिसिप्लिन भी. और तुम तो अच्छे भी हो कितने न. तुम्हारी आत्मा एकदम साफ़ है. सोचती हूँ कैसा होता होगा. हैविंग अन unbroken soul. unblemished. एकदम पाकरूह होना. जिसपर किसी के खून के छींटे न हों. किसी की तकलीफ के आँसू न हों. जिसने कभी किसी का बुरा न चाहा हो. किसी गिल्ट का खंजर जिसके जिस्म में न चुभा हो.

तुमने हाथ देखे हैं मेरे. दीज आर ब्लड लाइंस. मैकबेथ में था 'Will all the water in the ocean wash this blood from my hands? No, instead my hands will stain the seas scarlet, turning the green waters red.' रंग. रंग रंग. गहरा लाल. सुनो. तुम्हारे हाथ कांपते तो नहीं न? क्यूंकि अगर आखिरी लम्हे में तुम घबरा गए तो मौत बहुत तकलीफदेह हो जायेगी. मुझे और तकलीफ नहीं चाहिए. मैं ख़त लिख जाउंगी तुम्हारे नाम. जिसमें लिखा होगा कि तुम्हारा इसमें कोई दोष नहीं था. मैंने तुम्हारा माइंडवाश कर दिया है. मैं उसमें टोना टोटका की बातें भी लिख जाउंगी. मुझे डायन ही करार देना. फिर कोई जानना नहीं चाहेगा मेरी आत्मा से रिसते इस काले. गहरे. गाढे. अपराधबोध के बारे में. क्रिस्चियन लोग कहते हैं कि वी आर आल सिनर्स. हम भी तो कहते हैं एक दूसरे को पापी. मगर ये कलयुग है. यहाँ तो ऐसा ही होगा न.

मुझे आजकल बारिशें दिखती हैं बेतहाशा. मेरी आँखों पर बादल छाए रहते हैं. सब कुछ उदास और परेशान कर देने वाला है. इसमें मेरे लिए इतना ख्याल काफी है कि एक दिन इस सबसे मुक्त हो जाना है. जिंदगी में आई डोंट हैव ऐनी अनफिनिश्ड बिजनेस. कुछ अधूरा नहीं रखा है मैंने. यूं एक तरह से तो जिंदगी ख़त्म हो जाती है पूरी नहीं होती. अधूरी ही रहती है हमेशा.

इश्वर तुम्हारे हाथों को महफूज़ रखे.
आमीन. 

1 comment:

  1. Ek adhuri zindgi aur puri kahani....Bahut Khub!!!!

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