ये कहानी थोड़ी वायलेंट और डिस्टर्बिंग है.
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वे एक दूसरे को अधिक से अधिक तकलीफ देने के तरीके और मौके इजाद करते रहते थे. सीली सिगरेट पीने वाले ये प्रेमी वाकई दुनिया से अनोखे थे. उनका इश्वर भी उनकी तरह दर्द के कारोबार में लिप्त था...उनकी दुआएँ खून से सनी उँगलियों से ही लिखी जाती थीं.
वे नित नए गोदने खुदवाते थे कि प्रेम उनके शरीर पर भी दर्द के निशान छोड़ जाए. जीवन की अनुभूति दर्द से ही होती है ऐसा मानने वाले वे दोनों पागल एक नया धर्म बनाने की दिशा में निकल पड़े थे. दर्द की वजहें चाहे छोटी हों वे उन ज़ख्मों को खोद कर नासूर कर देने की कला में पारंगत थे. अगर एक किसी का जन्मदिन भूल जाता था तो दूसरा जिद करके या झगड़ कर याद नहीं दिलाता था बल्कि आग में पूरे साल जलता रहता था और अगले साल जन्मदिन से एक दिन पहले बताता था कि पिछले साल तुम मेरा जन्मदिन भूल गए थे...इस साल ऐसा फिर से न हो इसलिए मैं आज की रात आत्महत्या के ये तरीके शोर्टलिस्ट करके रख चुकी हूँ.
वे अक्सर एक दूसरे के चेहरे पर ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक लपेट देते थे...अपने प्रेमी को सांस सांस के लिए तड़पता देखना उनके लिए चरम सुख की अनुभूति लेकर आता था. तकलीफ देने की शुरुआत किसने की ये उन्हें बिलकुल याद नहीं है. प्रेम ऐसा ही तो होता है...किस मोड़ से दो लोग एक दूसरे की जिंदगी में जहर घोलने की शुरुआत कर दें कोई जान नहीं सकता है.
पहला आघात शारीरक था या मानसिक ये भी उन्हें याद नहीं है...पीठ पर निशान देखती है तो लड़की सोचती है कि शायद सबसे पहले चोट यहीं लगी होगी क्यूँ ये निशान उसे बिलकुल भी याद नहीं हैं...जिस्म उतारते हुए देखती है कि रूह जिस खूँटी पर टांगा करती थी वहाँ से खून रिस रहा है...रूह में टाँके सिलते हुए लड़की ने फिर कोशिश की कि रूह को जिस्म से सिल सके मगर रूह खोये हुए प्रेमी की तरह उसे हमेशा के लिए छोड़ कर जाना चाहती थी...उसने आंसुओं की एक चादर लपेट दी रूह के इर्द गिर्द...आंसुओं का नमक रूह को तकलीफ पहुंचाता रहता और लड़की को यकीन बना रहता कि उसका प्रेमी कहीं इर्द गिर्द ही होगा.
रात के ज़ख्म टीसते तो लड़की उनपर सस्ती शराब छिड़क कर आग लगा देती...धू धू करती रात उनके प्रेम का बेहद खौफनाक बैकड्रॉप तैयार करती...दंगे में जले घर जैसा दिन बीतता कि रात की राख उड़ती रहती और लड़का खून लिए हाथों से उसके बालों में उसके प्रियजनों के कटे हुए अंग गूंथता...उनका प्रेम अब घातक स्थिति में पहुँच गया था कि अब उन्हें एक दूसरे के किसी कृत्य से तकलीफ ही नहीं होती. ऐसे में एक ही चारा बचा था...उन्हें चोट पहुंचाने का जो इन्हें प्रिय थे.
किसी दिन लड़का लड़की की दुधमुंही बच्ची की बोतल में मिर्चियाँ उड़ेल आता तो कभी लड़की लड़के की बूढ़ी माँ की लाठी ऐसे काट के रख देती कि वो औंधे मुंह गिरती और उनकी कमर की पसली टूट जाती. प्रेम का ईश्वर अपने भक्तों के कांड देखता और अट्टहास करता जिससे आसमान से आग बरसने लगती और दुनिया के अच्छे प्रेमियों के सपने झुलस जाते. लोग दबे स्वरों में मांग उठाने लगे थे कि प्रेम के देवता को हमेशा के लिए नर्क में निष्काषित कर दिया जाए. कुछ मूर्ख प्रेमी हर रोज़ उसकी सत्ता पर सवाल उठाते और नफरत के ईश्वर के पास जा कर एक दूसरे के लिए जन्म जन्मांतर की नफरत मांग लाते. उन्हें लगता था नफरत भी प्रेम का ही एक स्वरुप है क्यूंकि प्रेम की तरह नफरत भी किसी से ताउम्र जोड़े रखता है.
लोगों ने बहुत कोशिश की उन्हें अलग करने की...मगर उन्हें चाहे दुनिया के दो कोनों पर ले जा कर छोड़ दिया जाता वे एक दूसरे के खून की गंध सूंघते पहुँच जाते. इसके अलावा इस बात का खतरा भी था कि वे जितने लोगों को जानेंगे उतने लोग इन्फेक्ट होंगे...उनके अंदर प्रेम अजीब किस्म से म्यूटेट हो चुका था...ऐसे खतरनाक प्रेम से डरने के सिवाए कोई चारा भी नहीं था. प्रेम लाइजाज तो हमेशा से रहा था मगर जब प्रेम को लेकर भावनाएं जिहादी किस्म की दीवानगी लिए हों तो उनका माइंडवाश करना नामुमकिन था.
उनकी हत्या करने की कोशिश भी की गयी...मगर वे दोनों साथ मरने के लिए अभिशप्त थे...उनकी जान एक दूसरे में बसती थी...किसी एक को मार दिया जाता तो दूसरा उसे खोज कर जिला देता...कितनी भी गहरी कब्र में जिन्दा दफना दिया जाए वे मरते नहीं. ये खतरनाक जादू था...और उनमें अद्भुत शक्तियों का जन्म होने लगा था...उनकी भक्ति से प्रेम का ईश्वर भी दिनों दिन और ताकतवर होने लगा था. दुनिया में हर किस्म के लोगों की जगह होती है...उनकी तरह और भी प्रेमी इस ईश्वर को पूजने लगे थे और नए कर्मकांडों का लिखना और जीना शुरू हो चुका था.
मगर किसी भी ईश्वर को स्थापित करने के लिए बलि चाहिए होती है...ये तो आदिम ईश्वर था...इसे तो मानवबलि ही चाहिए थी...आख़िरकार वो दिन आ ही गया जिसका कि प्रेम के देवता को इंतज़ार था...लड़का और लड़की एक दूसरे के जिस्म के भूखे हो गए...खून के प्यासे हो गए...और प्रेम के मंदिर में एक दूसरे को भोथरे तलवार से काटते हुए प्यासी जबान से एक दूसरे को पीते गए...रात बुझते बुझते दोनों प्रेमी एक दूसरे के जिस्म में घुला जहर पीने के कारण मर गए. उनका बलिदान अमरत्व को प्राप्त हो गया.
दुनिया के हर प्रेम में उस जोड़े का कुछ अंश मौजूद रहता है...जिसने भी कभी प्रेम किया हो वह जानता है कि प्रेम प्रमाण सिर्फ और सिर्फ तकलीफ को मानता है. प्रेम के कारोबार में खुशियाँ खोटे सिक्के की तरह उठा कर फ़ेंक दी जाती हैं...सबसे बड़ी करेंसी है आँसू...आहें...सिसकी...चीखें...और चेकबुक में लिखाता है...बेआवाज़ रोना. प्रेम का इश्वर और नफरत के इश्वर के बीच अब भी महायुद्ध चलता रहता है. कभी कभी तो लगता है नफरत का इश्वर प्रेम के इश्वर से ज्यादा दयालु है. मर जाने की इजाजत लेकिन इनमें से कोई भी धर्म नहीं देता.
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इस मुश्किल कहानी को लिखते हुए लेखिका आपके नाम मन्नत का धागा बांधती है कि इन ईश्वरों के सामने आपका सर कभी न झुके.
वे एक दूसरे को अधिक से अधिक तकलीफ देने के तरीके और मौके इजाद करते रहते थे. सीली सिगरेट पीने वाले ये प्रेमी वाकई दुनिया से अनोखे थे. उनका इश्वर भी उनकी तरह दर्द के कारोबार में लिप्त था...उनकी दुआएँ खून से सनी उँगलियों से ही लिखी जाती थीं.
वे नित नए गोदने खुदवाते थे कि प्रेम उनके शरीर पर भी दर्द के निशान छोड़ जाए. जीवन की अनुभूति दर्द से ही होती है ऐसा मानने वाले वे दोनों पागल एक नया धर्म बनाने की दिशा में निकल पड़े थे. दर्द की वजहें चाहे छोटी हों वे उन ज़ख्मों को खोद कर नासूर कर देने की कला में पारंगत थे. अगर एक किसी का जन्मदिन भूल जाता था तो दूसरा जिद करके या झगड़ कर याद नहीं दिलाता था बल्कि आग में पूरे साल जलता रहता था और अगले साल जन्मदिन से एक दिन पहले बताता था कि पिछले साल तुम मेरा जन्मदिन भूल गए थे...इस साल ऐसा फिर से न हो इसलिए मैं आज की रात आत्महत्या के ये तरीके शोर्टलिस्ट करके रख चुकी हूँ.
वे अक्सर एक दूसरे के चेहरे पर ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक लपेट देते थे...अपने प्रेमी को सांस सांस के लिए तड़पता देखना उनके लिए चरम सुख की अनुभूति लेकर आता था. तकलीफ देने की शुरुआत किसने की ये उन्हें बिलकुल याद नहीं है. प्रेम ऐसा ही तो होता है...किस मोड़ से दो लोग एक दूसरे की जिंदगी में जहर घोलने की शुरुआत कर दें कोई जान नहीं सकता है.
पहला आघात शारीरक था या मानसिक ये भी उन्हें याद नहीं है...पीठ पर निशान देखती है तो लड़की सोचती है कि शायद सबसे पहले चोट यहीं लगी होगी क्यूँ ये निशान उसे बिलकुल भी याद नहीं हैं...जिस्म उतारते हुए देखती है कि रूह जिस खूँटी पर टांगा करती थी वहाँ से खून रिस रहा है...रूह में टाँके सिलते हुए लड़की ने फिर कोशिश की कि रूह को जिस्म से सिल सके मगर रूह खोये हुए प्रेमी की तरह उसे हमेशा के लिए छोड़ कर जाना चाहती थी...उसने आंसुओं की एक चादर लपेट दी रूह के इर्द गिर्द...आंसुओं का नमक रूह को तकलीफ पहुंचाता रहता और लड़की को यकीन बना रहता कि उसका प्रेमी कहीं इर्द गिर्द ही होगा.
रात के ज़ख्म टीसते तो लड़की उनपर सस्ती शराब छिड़क कर आग लगा देती...धू धू करती रात उनके प्रेम का बेहद खौफनाक बैकड्रॉप तैयार करती...दंगे में जले घर जैसा दिन बीतता कि रात की राख उड़ती रहती और लड़का खून लिए हाथों से उसके बालों में उसके प्रियजनों के कटे हुए अंग गूंथता...उनका प्रेम अब घातक स्थिति में पहुँच गया था कि अब उन्हें एक दूसरे के किसी कृत्य से तकलीफ ही नहीं होती. ऐसे में एक ही चारा बचा था...उन्हें चोट पहुंचाने का जो इन्हें प्रिय थे.
किसी दिन लड़का लड़की की दुधमुंही बच्ची की बोतल में मिर्चियाँ उड़ेल आता तो कभी लड़की लड़के की बूढ़ी माँ की लाठी ऐसे काट के रख देती कि वो औंधे मुंह गिरती और उनकी कमर की पसली टूट जाती. प्रेम का ईश्वर अपने भक्तों के कांड देखता और अट्टहास करता जिससे आसमान से आग बरसने लगती और दुनिया के अच्छे प्रेमियों के सपने झुलस जाते. लोग दबे स्वरों में मांग उठाने लगे थे कि प्रेम के देवता को हमेशा के लिए नर्क में निष्काषित कर दिया जाए. कुछ मूर्ख प्रेमी हर रोज़ उसकी सत्ता पर सवाल उठाते और नफरत के ईश्वर के पास जा कर एक दूसरे के लिए जन्म जन्मांतर की नफरत मांग लाते. उन्हें लगता था नफरत भी प्रेम का ही एक स्वरुप है क्यूंकि प्रेम की तरह नफरत भी किसी से ताउम्र जोड़े रखता है.
लोगों ने बहुत कोशिश की उन्हें अलग करने की...मगर उन्हें चाहे दुनिया के दो कोनों पर ले जा कर छोड़ दिया जाता वे एक दूसरे के खून की गंध सूंघते पहुँच जाते. इसके अलावा इस बात का खतरा भी था कि वे जितने लोगों को जानेंगे उतने लोग इन्फेक्ट होंगे...उनके अंदर प्रेम अजीब किस्म से म्यूटेट हो चुका था...ऐसे खतरनाक प्रेम से डरने के सिवाए कोई चारा भी नहीं था. प्रेम लाइजाज तो हमेशा से रहा था मगर जब प्रेम को लेकर भावनाएं जिहादी किस्म की दीवानगी लिए हों तो उनका माइंडवाश करना नामुमकिन था.
उनकी हत्या करने की कोशिश भी की गयी...मगर वे दोनों साथ मरने के लिए अभिशप्त थे...उनकी जान एक दूसरे में बसती थी...किसी एक को मार दिया जाता तो दूसरा उसे खोज कर जिला देता...कितनी भी गहरी कब्र में जिन्दा दफना दिया जाए वे मरते नहीं. ये खतरनाक जादू था...और उनमें अद्भुत शक्तियों का जन्म होने लगा था...उनकी भक्ति से प्रेम का ईश्वर भी दिनों दिन और ताकतवर होने लगा था. दुनिया में हर किस्म के लोगों की जगह होती है...उनकी तरह और भी प्रेमी इस ईश्वर को पूजने लगे थे और नए कर्मकांडों का लिखना और जीना शुरू हो चुका था.
मगर किसी भी ईश्वर को स्थापित करने के लिए बलि चाहिए होती है...ये तो आदिम ईश्वर था...इसे तो मानवबलि ही चाहिए थी...आख़िरकार वो दिन आ ही गया जिसका कि प्रेम के देवता को इंतज़ार था...लड़का और लड़की एक दूसरे के जिस्म के भूखे हो गए...खून के प्यासे हो गए...और प्रेम के मंदिर में एक दूसरे को भोथरे तलवार से काटते हुए प्यासी जबान से एक दूसरे को पीते गए...रात बुझते बुझते दोनों प्रेमी एक दूसरे के जिस्म में घुला जहर पीने के कारण मर गए. उनका बलिदान अमरत्व को प्राप्त हो गया.
दुनिया के हर प्रेम में उस जोड़े का कुछ अंश मौजूद रहता है...जिसने भी कभी प्रेम किया हो वह जानता है कि प्रेम प्रमाण सिर्फ और सिर्फ तकलीफ को मानता है. प्रेम के कारोबार में खुशियाँ खोटे सिक्के की तरह उठा कर फ़ेंक दी जाती हैं...सबसे बड़ी करेंसी है आँसू...आहें...सिसकी...चीखें...और चेकबुक में लिखाता है...बेआवाज़ रोना. प्रेम का इश्वर और नफरत के इश्वर के बीच अब भी महायुद्ध चलता रहता है. कभी कभी तो लगता है नफरत का इश्वर प्रेम के इश्वर से ज्यादा दयालु है. मर जाने की इजाजत लेकिन इनमें से कोई भी धर्म नहीं देता.
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इस मुश्किल कहानी को लिखते हुए लेखिका आपके नाम मन्नत का धागा बांधती है कि इन ईश्वरों के सामने आपका सर कभी न झुके.

प्रेम के कारोबार में खुशियाँ खोटे सिक्के की तरह उठा कर फ़ेंक दी जाती हैं...सबसे बड़ी करेंसी है आँसू...आहें...सिसकी...चीखें...और चेकबुक में लिखाता है...बेआवाज़ रोना.
ReplyDeleteBARI KATIL POST HAI YE TO????
PRANAM.
खतरनाक कहानी.... आरम्भ से अंत तक बांधे रखा!
ReplyDeleteकई बार शरीर में सिहरन सी अनुभव हुयी!पता नहीं ऐसी कहानी लिखी जनि चाहिए या नहीं.... पर.....
पढता चला गया और दो-तीन बार पढ़ कर कमेन्ट करने की हालत में आया...
कुँवर जी,
uff
ReplyDeleteलेखिका ने मन्नत का धागा बंधा है कि इन ईश्वरों के सामने आपका सर कभी न झुके. साहस के लिए बधाई
ReplyDeletereally interesting
ReplyDeletekya kahoon?
ReplyDeleteउफ़, ये साहस भी क्यों.
ReplyDeleteप्रेम प्रमाण सिर्फ और सिर्फ तकलीफ को मानता है'
ReplyDeleteपर यह प्रेम प्रमाण क्यूं और किसके लिए.
गज़ब की लेखनी
आपकी पोस्ट पर साथी मित्रों की दिलचस्प टिप्पणियों ने आकर्षित किया तो हमने सोचा क्यों न इन्हें सहेज़ कर दूसरे पाठकों को भी पढाया जाए , शायद औरों को भी प्रेरणा मिले , हमने यही किया , कैसे ? आप टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें
ReplyDeleteआपके इस खूबसूरत पोस्ट का एक कतरा हमने सहेज लिया है आपातकाल और हम... ब्लॉग बुलेटिन के लिए, पाठक आपकी पोस्टों तक पहुंचें और आप उनकी पोस्टों तक, यही उद्देश्य है हमारा, उम्मीद है आपको निराशा नहीं होगी, टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें … धन्यवाद !
ReplyDeleteशैली और बिम्ब । दोनों की कमाल हैं ..सोच कहां से निकल कर कहां तलक जाती है समझ में आता है । प्रेम जैसे विषय पर ऐसी कहानी ...........मैंने पहले कभी नहीं पढी । अलग हट कर रही ये अभिव्यक्ति ।
ReplyDeleteपता नहीं प्रेम के आराध्य को बलि भाती है या नहीं...
ReplyDeleteप्रेम का ऐसा अनुभव ........पहली बार पढ़ा ! पता नही कहाँ से आप ऐसी सोच लाती है . खतरनाक .....भीभत्स...........घृणित .....होने के बाद भी ये प्रेम है !
ReplyDeleteगजब ...
ReplyDeleteइश्क मुझको नहीं वहशत ही सही,
ReplyDeleteमेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही,
हम कोई तर्के - वफा करते हैं,
न सही इश्क, मुसीबत ही सही।
हम भी तस्लीम की खू डालेंगे,
बेनियाजी तेरी आदत ही सही
देखो इतने लिखे को ग़ालिब दो लाइन में कैसे निपटाते हैं और तुमने इन दो लाइन बे बीच जमे हुए क्षेत्र को नदी बनाई है.
kaise likhti hain itna mast aap? gazab
ReplyDeleteकुछ अलग सा.
ReplyDeleteचेन्नई से...
ये कहानी वायलेंट और डिस्टर्बिंग है पर गलत तो नहीं...पूजा...ये कहानी इस दुनिया की ही है, मैं निशब्द हूँ, और क्या कहूं ...केवल आप ही लिख सकती हो !!!
ReplyDeletekya hai ye rongte khade ho gye padhte-padhte kaise likha aapne pata nahi
ReplyDeleteamazing!!! :-)
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