16 June, 2012

बुरे लड़के से प्यार करते हुए सोचती है अच्छी लड़की...

कहाँ थे तुम अब तक?
कि गाली सी लगती है
जब मुझे कहते हो 'अच्छी लड़की'
कि सारा दोष तुम्हारा है

तुमने मुझे उस उम्र में
क्यूँ दिए गुलाब के फूल
जबकि तुम्हें पढ़ानी थीं मुझे
अवतार संधु पाश की कविताएं

तुमने क्यूँ नहीं बताया
कि बना जा सकता है
धधकता हुआ ज्वालामुखी
मैं बना रही होती थी जली हुयी रोटियां

जब तुम जाते थे क्लास से भाग कर
दोस्त के यहाँ वन डे मैच देखने
मैं सीखती थी फ्रेम लगा कर काढ़ना
तुम्हारे नाम के पहले अक्षर का बूटा

जब तुम हो रहे थे बागी
मैं सीख रही थी सर झुका कर चलना
जोर से नहीं हँसना और
बड़ों को जवाब नहीं देना

तुम्हें सिखाना चाहिए था मुझे
कोलेज की ऊँची दीवार फांदना
दिखानी थीं मुझे वायलेंट फिल्में
पिलानी थी दरबान से मांगी हुयी बीड़ी

तुम्हें चूमना था मुझे अँधेरे गलियारों में
और मुझे मारना था तुम्हें थप्पड़
हमें करना था प्यार
खुले आसमान के नीचे

तुम्हें लेकर चलना था मुझे
इन्किलाबी जलसों में
हमें एक दूसरे के हाथों पर बांधनी थी
विरोध की काली पट्टी

मुझे भी होना था मुंहजोर
मुझे भी बनना था आवारा
मुझे भी कहना था समाज से कि
ठोकरों पर रखती हूँ तुम्हें

तुम्हारी गलती है लड़के
तुम अकेले हो गए...बुरे
जबकि हम उस उम्र में मिले थे
कि हमें साथ साथ बिगड़ना चाहिए था

29 comments:

  1. मुझे भी कहना था समाज से कि
    ठोकरों पर रखती हूँ तुम्हें

    तुम्हारी गलती है लड़के
    तुम अकेले हो गए...बुरे
    जबकि हम उस उम्र में मिले थे
    कि हमें साथ साथ बिगड़ना चाहिए था


    I like ur thoughts very much. Ab koi gal aise Q ni sochti......ni mila mai ab tk kisi aisi gal se,but i'm waiting 4 her

    ReplyDelete
  2. मुझे भी कहना था समाज से कि
    ठोकरों पर रखती हूँ तुम्हें

    वाह!! बहुत ही बेहतरीन सोच है... कुछ इसी तरह के संवादों भरी कहानी मैंने कुछ दिनों पहले लिखी थी.. जिसमें एक लड़की ने एक लड़के को क्या खूब समझाया था...
    इस रचना की जड़े जुड़ी है मन की गहराई से.. कुछ टूटकर सतह पर आ जाती हैं तैरते हुए..
    (http://manobhumi.wordpress.com/)

    ReplyDelete
  3. बेहद गहन और सशक्त अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  4. बुरे लड़के से ....प्यार क्यों करती है अच्छी लड़की ?
    ये ही उम्र का तकाज़ा है .....
    बिंदास ! अच्छी लड़की :-)
    खुश रहो!

    ReplyDelete
  5. तुम्हें चूमना था मुझे अँधेरे गलियारों में
    और मुझे मारना था तुम्हें थप्पड़
    हमें करना था प्यार
    खुले आसमान के नीचे

    ये बात हुई न कुछ हटाकर नहीं सीधी सच्ची .खुबसूरत बेबाक लेकिन दिल के करीब ...लाजवाब ....

    ReplyDelete
  6. प्रेम में आवरण बनना और अपने उपर सब झेलना, किसी एक को निभाना होता है यह। कोमलता को संजोकर रखना होता है, संभवतः प्रेम का मर्म यही होता है..

    ReplyDelete
  7. असाधारण ............प्रेम की नयी व्याख्या!!
    अभी तक मैं यही सोचता था -
    "प्रेम में साथ साथ बढ़ना होता है ...
    जीवन के उच्चतम आदर्शो को प्राप्त करना होता है ...प्रेम यानी आदर्श?"
    लेकिन आपकी कविता को पढ़ एक नयी धारणा बनी!
    लाजबाब!!

    ReplyDelete
  8. bahut hi sundar rachna..........

    ReplyDelete
  9. आपकी इस भाव-रचना का एक बार में पाठ कर गया... बहुत प्रवाहमय हैं भाव.


    एक 'अच्छी लड़की' की 'बुरे' बन चुके 'लड़के' के प्रति ढेर सारी शिकायतें क्या वाजिब हैं?

    मुझे किसी की बात याद आ रही है, उसमें था--"सुविधा से किसी के साथ चलने के लिये उसका विपरीत हाथ अपने हाथ में लेना होता है."

    दो व्यक्ति अपने-अपने सीधे हाथ एक साथ मिलाकर नहीं चल सकते.... मैंने अपनी पत्नी से कहा-- "देखा, हम दोनों विपरीत रुचियों के हैं, इसलिये निभ रही है.' अन्यथा हम दोनों ही एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी होते. जाने, तब क्या होता?"

    ReplyDelete
  10. isse badiya kuch or nahi ho sakta
    तुमने क्यूँ नहीं बताया
    कि बना जा सकता है
    धधकता हुआ ज्वालामुखी
    मैं बना रही होती थी जली हुयी रोटियां

    जब तुम जाते थे क्लास से भाग कर
    दोस्त के यहाँ वन डे मैच देखने
    मैं सीखती थी फ्रेम लगा कर काढ़ना
    तुम्हारे नाम के पहले अक्षर का बूटा

    shabd nahi hain in shabdo ki tareef karne ko....

    ReplyDelete
  11. समाज 'बैड ब्वायज' और 'गुड गर्ल्स' ही पसंद करता है...

    ReplyDelete
  12. प्रेम के लिए जरूरी होता है बुरा लड़का होना ,की अच्छे लड़के खुल के सांस भी नहीं ले पाते | अच्छे लड़के आई .आई. टी ,आई.आई.ऍम ....में रहते हैं ,उन्हें मार्केट पोलिसीस आती है ,बैंकिंग आती है ......................दरबान से मांग बीडी पीने वालों को प्रेम आता है ,इत्तेफाक ही है ,अछि पर बेवकूफ लड़कियां ,प्रेम के लिए डिग्री नहीं देखतीं | और यह अच्छा है |

    ReplyDelete
  13. बहुत खूब! यह कविता बहुत दिन तक याद रखी जायेगी।

    ReplyDelete
  14. अनूप शुक्ला: आज ये पूजा मैम तो बड़ी धांसू कविता लिख मारी,
    me: aaj ?
    अनूप: बवालजयी टाइप की!
    hamane to टिपिया भी दिया था
    बहुत खूब! यह कविता बहुत दिन तक याद रखी जायेगी।

    ReplyDelete
  15. बुराई की अपनी एक 'अच्छाई' भी तो होती है
    और फिर 'मुहजोर' का ही तो जोर चलता है

    ReplyDelete
  16. तुमने मुझे उस उम्र में
    क्यूँ दिए गुलाब के फूल
    जबकि तुम्हें पढ़ानी थीं मुझे
    अवतार सिंधु पाश की कविताएं
    वाह!
    अच्छी लड़की की स्पष्ट सोच से सज कर कविता अच्छे/बुरे से परे यादगार हो गयी है!

    ReplyDelete
  17. बिलकुल सच! अच्छा बनना बुरे बनने से ज्यादा रिग्रेटफूल होता है !

    ReplyDelete
  18. bht kuch yaad dila gyi ye rachna...
    jus loved it :)

    ReplyDelete
  19. कुय़ कहूं....लड़की बदल रही है.....मैं क्यूं बना रहूं अच्छा .. लड़का भी यही सोचता है...सोच रहा हूं कि..नाइस गॉय वाली कहावत बदलनी चाहिए

    ReplyDelete
  20. पहले कैसे छूट गयी यह कविता मुझसे...
    सच में बेहतरीन है...
    अनूप जी की शब्दों में कहूँ तो "बवालजयी टाइप की"(सागर के कमेन्ट से साभार :P)

    ReplyDelete
  21. तुमने मुझे उस उम्र में
    क्यूँ दिए गुलाब के फूल
    जबकि तुम्हें पढ़ानी थीं मुझे
    अवतार सिंधु पाश की कविताएं................. JUST SPEECHLESS.

    ReplyDelete
  22. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  23. पढ़कर एक बार फिर उन्ही गलियों में भटकने लगा मन।बहुत सच्ची सी लगती कविता .प्रेम से भींगी हुई .

    ReplyDelete
  24. स्त्री स्वतंत्रता पर लिखी कविताओं में यह कविता मील का पत्थर साबित होगी !इस स्वर और इस तेवर को सलाम करता हूँ !पूजा उपाध्याय को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  25. ek bindaass ladki banane ki lalak dikh rahi hai.. bahut behtareen..:)

    ReplyDelete

Related posts

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...