07 January, 2012

कि जैसे महबूब की मुस्कुराती आँखें

अरे, ऐसे कैसे!
बताओ मुझे, कौन है वो दुष्ट
जो तुम्हारे रातों की नींद
सारी की सारी लेकर चल दिया
और अपने वालेट में सजा के रखता है
कि जैसे महबूब की मुस्कुराती आँखें

हद्द है...मना तो करो!
ऐसे कैसे तुम्हारे ख्वाबों पर
एकाधिपत्य हो जाएगा उसका
सल्तनत है...कोई छोटा शहर थोड़े है
होगा वो शहजादा अपने देश का
तुम कोई राजकुमारी से कम हो!

तौबा, ये मज़ाक था!
तुमने कह किया उससे प्यार नहीं है
और जो उसने यकीन कर लिया तो?
लौट के नहीं आया तो?
तुम्हें भूल गया तो?

पगली, तेरा क्या होगा!
ऐसे प्यार मत किया कर
मर जाएगी ऐसे ही एक दिन
कौन उबारेगा तुझे
जान दे तेरे लिए ऐसा कहाँ है?

न ना, कितने ख़त भेजोगी?
अबकी बार कासिद के साथ जा
ख़त सुना दे खुद ही
जवाब भी मांग लेना
कि उसके बाद कुछ दिन तो
रहेगा...चैन

चल, जाने दे!
रात लम्बी है
और यादें बहुत सी
शब्दों का गट्ठर खोल
नीचे कहीं मिलेगा
तह लगाया हुआ
'लव यू'
उसकी खुशबू में भीग
उसकी धुन पर थिरक 
उसकी उँगलियाँ पकड़  


और यूँ बेबाक मत हंस री लड़की 
फरिश्तों के दिल डोल जाते हैं 
खुदा तेरे इश्क को बुरी नज़र से बचाए!

4 comments:

  1. शुभानअल्लाह!!!!!
    इंशा-अल्लाह प्यार पूरा हो जाए !!!! "आमीन" भी बोल देता हूँ :)

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  2. प्रेमी की आँखों में जहाँ ढूढ़ने की परम्परा पुरानी है,
    क्या प्रेम की यही एक सिमटी कहानी है..

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  3. वाह री मोहब्बत

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  4. अरे, ऐसे कैसे!
    बताओ मुझे, कौन है वो दुष्ट
    जो तुम्हारे रातों की नींद
    सारी की
    जो तुम्हारे रातों की नींद
    सारी की सारी लेकर चल दिया
    और अपने वालेट में सजा के रखता है
    कि जैसे महबूब की मुस्कुराती आँख....
    bahut hi umda.....

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