28 July, 2009

एक सबब जीने का...एक तलब मरने की...



कुछ जवाबों का हमें ता उम्र इंतज़ार रहता है...खास तौर से उन जवाबों का जिनके सवाल हमने कभी पूछे नहीं, पर सवाल मौजूद जरूर थे...और बड़ी बेचारगी से अपने पूछे जाने की अर्जी लिए घूमते थे...और हम उससे भी ज्यादा बेदर्द होकर उनकी अर्जियों की तरफ़ देखते तक नहीं थे...


जिसे नफरत तोड़ नहीं सकती...उपेक्षा तोड़ देती है, नफरत में एक अजीब सा सुकून है, कहीं बहुत गहरे जुड़े होने का अहसास है, नफरत में लगभग प्यार जितना ही अपनापन होता है, बस देखने वाले के नज़रिए का फर्क होता है...


कुछ ऐसे जख्म होते हैं जिनका दर्द जिंदगी का हिस्सा बन जाता है...बेहद नुकीला, हर वक्त चुभता हुआ, ये दर्द जीने का अंदाज ही बदल देता है...एक दिन अचानक से ये दर्द ख़त्म हो जाए तो हम शायद सोचेंगे कि हम जो हैं उसमें इस दर्द का कितना बड़ा हिस्सा है...जिन रास्तों पर चल के हम आज किसी भी मोड़ पर रुके हैं, उसमें कितना कुछ इस दर्द के कारण है...इस दर्द के ठहराव के कारण कितने लोग आगे बढ़ गए...हमारी रफ़्तार से साथ बस वो चले जो हमारे अपने थे...इस दर्द में शरीक नहीं...पर उस राह के हमसफ़र जिसे इस दर्द ने हमारे लिए चुना था।


मर जाने के लिए एक वजह ही काफ़ी होती है...पर जिन्दा रहने के लिए कितनी सारी वजहों की जरूरत पड़ती है...कितने सारे बहाने ढूँढने पड़ते हैं...कितने लोगों को शरीक करना पड़ता है जिंदगी में, कितने सपने बुनने पड़ते हैं, कितने हादसों से उबरना पड़ता है और मुस्कुराना पड़ता है...


मौत उतनी खूबसूरत नहीं है जितनी कविताओं में दिखती है...


कविताओं में दिखने जैसी एक ही चीज़ है...इश्क...एक ही वजह जो शायद समझ आती है जीने की...प्यार वाकई इतना खूबसूरत है जितना कभी, कहीं पढ़ा था...और शायद उससे भी ज्यादा...


और तुम...बस तुम...वो छोटी सी वजह हो मेरे जीने की...


23 comments:

  1. और तुम...बस तुम...वो छोटी सी वजह हो मेरे जीने की...


    -बहुत खूब कहा:

    कविताओं में दिखने जैसी एक ही चीज़ है...इश्क

    -क्या बात है!!

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  2. kavita sirf aur sirf prem ki abhivyakti hai
    pahle bhi thi
    aur aage bhi rahegi

    bhai is duniya me pyaar ke alaava hai kya jo
    hamen jeene k liye lalayit kar sake ?

    aapki baat aur baat me nihit karaamat ka main abhinandan kartaa hoon aur praarthnaa kartaa hoon ki aapki jeene ki vajah sada sada bani rahe..........
    badhaai !

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  3. wo kaafi khush hote honge roz apne baare mein itna sab kuch sunkar aur padhkar bhee :)

    badhiya hai..

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  4. मर जाने के लिए एक वजह ही काफ़ी होती है...पर जिन्दा रहने के लिए कितनी सारी वजहों की जरूरत पड़ती है...कितने सारे बहाने ढूँढने पड़ते हैं...कितने लोगों को शरीक करना पड़ता है जिंदगी में, कितने सपने बुनने पड़ते हैं, कितने हादसों से उबरना पड़ता है और मुस्कुराना पड़ता......


    सही कहा...

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  5. आज तो सूक्तिपरक लिख डाला आपने । न जाने कितने सत्य भी बिखरे पड़े हैं यहाँ ।

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  6. मर जाने के लिए एक वजह ही काफ़ी होती है...पर जिन्दा रहने के लिए कितनी सारी वजहों की जरूरत पड़ती है...कितने सारे बहाने ढूँढने पड़ते हैं...कितने लोगों को शरीक करना पड़ता है जिंदगी में, कितने सपने बुनने पड़ते हैं, कितने हादसों से उबरना पड़ता है और मुस्कुराना पड़ता है...

    शायद एक एक शब्द को सजाया गया है. बेहद सुंदरतम पोस्ट.

    रामराम.

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  7. जिसे नफरत तोड़ नहीं सकती...उपेक्षा तोड़ देती है..

    कितना सही लिखा है पूजा...बहुत सही..

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  8. ये तो नाइंसाफी है. बस केवल एक ही बजह!

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  9. नज़्म, कविता, शायरी- तुम्हारे शब्द, सारे शब्द!

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  10. सच कहा पूजा जी आपने...अगर सबसे ज्यादा खूबसूरत कुछ है तो वो 'इश्क' ही होगा...कविता में बताये जाने से बेहतर

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  11. बहुत सुन्दर सत्य बशाई इस्रचना के लिये

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  12. ये पंक्तियाँ लिखने के लिये इन भावनाओं को जीने की ज़रूरत है। सुनी सुनाई बातों वाले ये लिख नही सकते। आप भाग्यशाली हैं कि जीवन की ये खास घटना इस शिद्दत के साथ जी रही हैं। खलील ज़िब्रान की प्रॉफेट ना पढ़ी हो तो पढ़ लें....! आपको पसंद आयेगी :)

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  13. कई बार समय के साथ साथ
    जीने की वज़ह भी बदलती रहती है.
    जैसे कपड़े...
    पहले प्यार के लिए और अब परिवार के लिए...

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  14. मौत के भी कई सबब होते है .जीने के भी....कई बार मौत कुछ सबब अपने पीछे छोड़ जाती है ....ओर कई बार किसी दुसरे के लिए जीने का सबब....सब कुछ इतना गडमड है की...आप किसी एक सबब को सबब नहिकः सकते.....हाँ .प्यार बिना सबब होता है ....

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  15. मर जाने के लिए एक वजह ही काफ़ी होती है...पर जिन्दा रहने के लिए कितनी सारी वजहों की जरूरत पड़ती है...

    वाह क्या खूब कहा है |

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  16. उसी इश्क़ की नींद में डूबा सिर्फ एक सपना........बस एक ही सपना........ एक सपना.....भोर के कुहासे में चमकती उम्मीद की शबनमी बूंदों का........कांपती,खिलती कलियों और किसी के गेसूओं में लगने वाले सुलगते फूल का........और इसी उम्मीद में बरस रहे उस संगीत का........जो मुझे उस इश्क़ की ताल और धुन पर मदहोश करती जा रही........बरसों से....!!



    लफ्ज़ अलग अलग हैं.....दर्द एक....इश्क़ भी एक......!!

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  17. दिल को छूती सच्ची और गहरी बातें सुन्दर शब्दों से लिखी हुई।
    जिसे नफरत तोड़ नहीं सकती...उपेक्षा तोड़ देती है
    सच्ची बात।
    मर जाने के लिए एक वजह ही काफ़ी होती है...पर जिन्दा रहने के लिए कितनी सारी वजहों की जरूरत पड़ती है
    जिदंगी को बयान करती बात।
    मौत उतनी खूबसूरत नहीं है जितनी कविताओं में दिखती है
    मौत तू एक कविता है ...... ये बात याद आ गई।
    कविताओं में दिखने जैसी एक ही चीज़ है...इश्क
    मीठी बात।

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  18. जो कंचन जी ने कहा है वही कहना चाहती हूँ

    कंचन - यह पंक्तियाँ लिखने के लिये इन भावनाओं को जीने की ज़रूरत है। आप भाग्यशाली हैं कि जीवन की ये खास घटना इस शिद्दत के साथ जी रही हैं।

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  19. tere ishq mein..jeete rahe ...marte rahe .. ter ishq mein...!!

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  20. tere ishq mein..jeete rahe ...marte rahe .. ter ishq mein...!!

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  21. wow, what an amazing piece of desire n passion! i just stumbled upon it accidently, and liked it immensely. har baat mein kuch baat hai! u can also read my creations on lecafe.rediffblogs.com
    apna bhi chhota sa aashiyana hai, waha par humne bhi kuch gul khilaye hai :)

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