25 January, 2009

मुकम्मल


कोई तो बात होगी तुममें

जो तुमसे मिलकर...

जिंदगी मुकम्मल लगने लगी


हाशिये पर बिखरे पड़े अल्फाज़

खतों की मानिंद सुकून देने लगे

जिस रोज़ तुमने इन पन्नो को हाथ में उठाया


वो आधी नींद की बेहोशी में खटके से उठना

रुक गया है...

मैं पुरसुकून ख्वाबों के आगोश में ही जागती हूँ


वो लब जिनपर आंसू थामे रहते थे

तेरे नाम की सरगोशी से

मुस्कुराने लगे हैं...


तुममें ऐसी कितनी बातें हैं जान...

कि तुमसे मिलकर

जिंदगी मुकम्मल लगने लगी है।






15 comments:

  1. तुममें ऐसी कितनी बातें हैं जान...

    कि तुमसे मिलकर

    जिंदगी मुकम्मल लगने लगी है।
    sunder rachana

    ReplyDelete
  2. वो लब जिनपर आंसू थामे रहते थे

    तेरे नाम की सरगोशी से

    मुस्कुराने लगे हैं...

    बेहतरीन रचना के लिए बधाई
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  3. वो आधी नींद की बेहोशी में खटके से उठना
    रुक गया है...
    मैं पुरसुकून ख्वाबों के आगोश में ही जागती हूँ

    बहुत सुंदर तरीके से संजोया है शब्दों को अच्छी कविता

    ReplyDelete
  4. पूजा जी तुस्सी छा गए ...इतना शब्द संचय कहाँ से .....तारीफ के लिए कुछ शब्द उधार दे दीजिये न

    अनिल कान्त
    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  5. "तुममें ऐसी कितनी बातें हैं जान.../कि तुमसे मिलकर/जिंदगी मुकम्मल लगने लगी..."
    आपके शब्दों का भावों के साथ इतना बढ़िया सामंजस्य बैठता है कि मैं कई बार ठगा सा रह जाता हूं...और उस अदने से शेर की इतनी तारीफ़!!!!!

    ReplyDelete
  6. प्रथम प्रेम का सजीव वर्णन । सुंदर कविता ।

    ReplyDelete
  7. प्यार से भरी, बताशे सी मीठी रचना लिखी है आपने। अद्भुत।

    ReplyDelete
  8. khubsurat ehsaas aur anubhuti sundar.

    ReplyDelete
  9. मैं पुरसुकून ख्वाबों के आगोश में ही जागती हूँ
    ........
    bahut bhawbheene ehsaas

    ReplyDelete
  10. Very very intense emotions....

    ReplyDelete
  11. बहुत लाजवाब. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    ReplyDelete
  12. बेमिसाल !



    ख़ास पुजाइश अंदाज !

    ReplyDelete
  13. लग रहा है जैसे चिट्ठी लिख गयी पहली-पहली। शब्दों की कशिश ने लुभाया बहुत ।

    ReplyDelete
  14. वो आधी नींद की बेहोशी में खटके से उठना

    रुक गया है...

    मैं पुरसुकून ख्वाबों के आगोश में ही जागती हूँ

    sabhi shabd moti ke saman aur feelngs se bhare hue.. mujhe woh kavitaye ya shabd bahut pasand hai jispe bhawnaye bhari ho :-) isiliye aap aur Anurag sir aur Chhiyaishi mere favorite blogger ho gaye hai.. keep writing

    New Post - .......................................................

    ReplyDelete
  15. ऐसा लगता है जैसे किसी ने कानों में मिश्री घोल दी हो. लाजवाब रचना है.

    ReplyDelete

Related posts

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...