05 August, 2008

मुझे मुहब्बत है...

















i absolutely love my new home...if love can be absolute in any वे


























मेरे नए घर की हर चीज़ मुझे बेहद पसंद है...एक एक कर के बताती हूँ













मेरे घर आने का रास्ता इस इस इस के पेड़ों से ढका हुआ है, दोनों तरफ़ गुलमोहर के पेड़ और रास्ते पर आती हलकी धूप छाँव, जैसे चलते हुए ही महसूस होने लगता है कि मंजिल बाहें फैलाये इन्तेज़ार कर रही है।













वैसे रास्ता इतना खूबसूरत हो तो मंजिल न भी मिले अफ़सोस नहीं होता...






मेरे घर के ठीक पीछे एक मन्दिर है, और हर shaa जब साँझ देती हूँ तो वहां से आती घंटियों की आवाज़ ऐसे लगती है जैसे मेरे कमरे में ही आरती हो रही हो...आंख बंद करती हूँ तो जैसे मन्दिर में ही पहुँच जाती हूँ। उसपर बालकनी में चिडियों के वापस लौटने का शोर...बादलों के कई रंगों में रंगी शाम, जैसे जिंदगी इसी को कहते हैं।







और is के बाद होती रहती है मेरी खुराफात, किचन में...तो मैंने दिखाती हूँ की मैंने क्या बनाया कलlको





और इसके बाद होती रहती है मेरी खुराफात, किचन में...तो मैंने दिखाती हूँ की मैंने क्या बनाया कल रात को...इसे हमारे यहाँ चितवा कहते हैं, कई जगह चिल्का या चिल्ला भी कहा जाता है. इसे बनाना आसन है, बस बेसन में थोड़ा प्याज, हरी मिर्च, टमाटर, बंधगोभी टाइप चीज़ बारीक काट के डालो, अजवाइन, जीरा, थोड़ा सा लाल मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर डालो, पानी दल ke मिक्स करो और बस, तवा पर डोसा टाइप फैलाते जाओ. दो मिनट में awesome खाना तैयार इसको कोई भी प्राणी सिर्फ़ अचार के साथ चट कर सकता है...लेकिन कुछ भुक्खड़ लोग हल्ला कर के सब्जी भी बनवाते हैं जैसा कि आप देख रहे हैं. खुशनसीब लोगो को हमारे हाथ का खाना खाने मिलता है. :D






aur khushnaseeb logo ko milti hai aisi neend








5 comments:

  1. बहुत बहुत बधाई जी.. भगवान ऐसा घर सभी को दे

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  2. चलिए जी कुछ तो पसंद आया ...पहली दो फोटो मुझे क्यों नही दिख रही है......ओर ये चिल्ला जरा शेप में नही है....ऐसी शेप तो हम ओम्लेट में देते थे .....आधा प्याली चाय ओर चिल्ला.......मजे ही मजे है....

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