27 June, 2008

एक नज़्म...

तू छिपा ले अपना दर्द मुस्कान के पीछे
पर मेरी आंखों में बादल बन बरसता तो है

तू चाहे तो कर मुझसे बेईन्तहा नफरत
यूँ ही सही तू मुझे सोचता तो है

मुझसे दूर जाने की खातिर ही घर बदला होगा तूने
पर गुजरता था जहाँ से तू वो रास्ता तो है

तू अपने आसमाँ को देखता है मैं अपने आसमाँ को देखती हूँ
पर जिस चाँद को तूने देखा वो कुछ मेरा भी तो है

अपने दोस्तों से तो तू लड़ नहीं सकता
मेरे बिना तेरा गुस्सा तनहा तो है

तुम्हारी जिंदगी की किताब में धुंधला सा ही सही
पर मेरी यादों का एक पन्ना तो है


२१/२/०१

7 comments:

  1. तू चाहे तो कर मुझसे बेईन्तहा नफरत
    यूँ ही सही तू मुझे सोचता तो है
    तुम्हारी जिंदगी की किताब में धुंधला सा ही सही
    पर मेरी यादों का एक पन्ना तो है
    ye paktiya bhut aachi lagi.bhut hi gahari.ati uttam. likhati rhe.

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  2. तू चाहे तो कर मुझसे बेईन्तहा नफरत
    यूँ ही सही तू मुझे सोचता तो है
    तुम्हारी जिंदगी की किताब में धुंधला सा ही सही
    पर मेरी यादों का एक पन्ना तो हैअपने दोस्तों से तो तू लड़ नहीं सकता
    मेरे बिना तेरा गुस्सा तनहा तो है

    agree with rashmi....

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  3. तू छिपा ले अपना दर्द मुस्कान के पीछे
    पर मेरी आंखों में बादल बन बरसता तो है
    तुम्हारी जिंदगी की किताब में धुंधला सा ही सही
    पर मेरी यादों का एक पन्ना तो है
    कितने प्यारे जज्बात लिख दिये आपने।

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  4. मुझसे दूर जाने की खातिर ही घर बदला होगा तूने
    पर गुजरता था जहाँ से तू वो रास्ता तो है
    wowwwwwwww
    wat to say, some how touched me. might be close to my feelings
    goood one

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  5. तू चाहे तो कर मुझसे बेईन्तहा नफरत
    यूँ ही सही तू मुझे सोचता तो है

    bahut hi badhiya sher, bahut umda, thoughts kafi gehre hain. likhti rahiye

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  6. bahut khoob bahut badiya likha haa...........

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